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44 साल बाद पडरौना राजदरबार की 1503.57 एकड़ सीलिंग भूमि सरकार में निहित
- दैनिक लोक भारती
- 19 Aug, 2026
लंबे कानूनी संघर्ष के बाद हुआ अंतिम निस्तारण, गरीबों को कृषि और आवासीय पट्टा मिलने का रास्ता साफ
कुशीनगर। पडरौना राजदरबार की विशाल भू-संपदा से जुड़े 44 वर्ष पुराने सीलिंग विवाद का आखिरकार निस्तारण हो गया। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की प्रभावी पैरवी और लगातार अनुश्रवण के बाद नियत प्राधिकारी (सीलिंग)/अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), कुशीनगर ने 14 अगस्त 2026 को मामले में अंतिम आदेश पारित किया। आदेश के तहत 1503.57 एकड़ अतिरिक्त भूमि राज्य सरकार में निहित कर दी गई है।
प्रशासन के अनुसार इस फैसले से क्षेत्र के भूमिहीन और गरीब परिवारों को कृषि एवं आवासीय पट्टा दिए जाने का रास्ता साफ हुआ है। इसके अलावा विद्यालय, अस्पताल, खेल मैदान, आंगनवाड़ी केंद्र, पंचायत भवन समेत विभिन्न जनकल्याणकारी विकास कार्यों के लिए भी भूमि उपलब्ध हो सकेगी।
1978 में शुरू हुई थी सीलिंग कार्रवाई
यह मामला पडरौना राजदरबार की मृतक सीलिंग खातेदार रानी रेवती देवी पत्नी स्वर्गीय रवि प्रताप नरायन सिंह, निवासी पडरौना की भूमि से जुड़ा है। उनकी संपत्तियां तहसील पडरौना, खड्डा, कसया और कप्तानगंज में स्थित थीं। इन भू-संपत्तियों के संबंध में उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम के तहत सीलिंग की कार्रवाई शुरू की गई थी।
नियत प्राधिकारी ने 30 नवंबर 1978 को पुराने सीलिंग अधिनियम 1960 के तहत 359.61 एकड़ तथा संशोधित सीलिंग अधिनियम 1974 के तहत सिंचित अर्थों में 66.75 एकड़, जबकि सामान्य अर्थों में 131.23 एकड़ भूमि अतिरिक्त घोषित की थी।
इस आदेश के खिलाफ खातेदार ने तत्कालीन जिला जज, देवरिया के समक्ष अपील दाखिल की। अपीलीय न्यायालय ने 3 फरवरी 1982 को पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया।
हाईकोर्ट में पहुंचा मामला, 2002 में खत्म हुआ स्थगन
पुनः कार्रवाई शुरू होने के बाद सीलिंग खातेदार रानी रेवती देवी और अन्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका संख्या 905/1983 दाखिल की। हाईकोर्ट ने 21 जनवरी 1983 को सीलिंग कार्रवाई पर स्थगन आदेश जारी कर दिया।
काफी समय तक मामला लंबित रहा। बाद में 5 जुलाई 2002 को याचिका ‘Dismissed in default’ यानी अभाव में खारिज कर दी गई। याचिका खारिज होने के साथ ही पहले जारी स्थगन आदेश भी समाप्त हो गया।
प्रशासन के अनुसार स्थगन समाप्त होने के बाद भी तथाकथित वारिसों की ओर से सैकड़ों एकड़ सरकारी भूमि को अवैध तरीके से खुर्द-बुर्द करने और बिक्री का प्रयास किए जाने की स्थिति बनी रही। इससे सरकारी भूमि को नुकसान पहुंचने की आशंका थी।
14 अगस्त को हुआ अंतिम फैसला
मामले में नियत प्राधिकारी (सीलिंग)/अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), कुशीनगर ने तेजी से कार्रवाई करते हुए संबंधित न्यायिक आदेशों के अनुपालन में 14 अगस्त 2026 को अंतिम आदेश पारित किया।
आदेश के तहत सीलिंग खातेदार के विधिक उत्तराधिकारियों के उपयोग के लिए नियमानुसार केवल 18.04 एकड़ सिंचित भूमि छोड़ी गई। इसके अलावा 1503.57 एकड़ भूमि को अतिरिक्त घोषित करते हुए राज्य सरकार में निहित कर दिया गया।
तहसीलवार इतनी जमीन हुई सरकार में निहित
प्रशासन द्वारा जारी विवरण के अनुसार 1503.57 एकड़ भूमि चार तहसीलों में स्थित है।
पडरौना तहसील — 339.54 एकड़
पडरौना तहसील के कुल 68 गांवों की 339.54 एकड़ भूमि अतिरिक्त घोषित की गई है। इसमें सिधुआ, हिरनहा, नोनिया पट्टी, पडरौना, पगरा बुजुर्ग, रतनवा, परसौनी कला, जंगल खिरकिया, गम्हिरिया खुर्द, जानकी नगर, त्रिलोकपुर खुर्द, चैती मुसहरी, चिरईहवा, बकुलहा, जगदीशपुर जंगल, जंगल चौरिया, बन्धू छपरा, कंठी छपरा, खड्डा खुर्द, अरनहवा, मोजाहिदा खास, बाजू पट्टी, पटहेरिया आवादकारी, खेरिया, रामबल कुकरहा, जंगल बेलवा, कंठी छपरा, गांधी कोठिलवा, एकवनही उर्फ भागवतपुर, सिंगापट्टी, शाहपुर जंगल, धर्मपुर, सेमरिया कला, कॉटी, विशुनपुरा, नौतन हरदो, सिधुआ बांगर, प्रसादपुर रसूलपुर, मिल्हा, बेलहा, सिसवा मठिया, नादह हरैया बुजुर्ग, कसिया, परसौनी, धोरहरा, परखनहा आवादकारी, गांगरानी, कोहरवलिया, जंगल अमवा बबुईया हरपुर, विशुनपुरा, जगदीशपुर, मिश्रौली खिरकिया जंगल, हिरनहीं, गम्हिरिया बुजुर्ग, मोजाहिदा, रायगंज, जंगल गायघाट, पकडियार बेलही, हरैया बुजुर्ग, डुम्भरभार, पचफेड़ा और बढ़वलिया खुर्द आदि शामिल हैं।
खड्डा तहसील — 1127.43 एकड़
खड्डा तहसील के 23 गांवों की 1127.43 एकड़ भूमि अतिरिक्त घोषित की गई है। इसमें मदनपुर सुकरौली, धरनी पट्टी, रामजी पट्टी, कोप जंगल, खड्डा कला, खड्डा, सिसवा राम सहाय, सिसवा मनिराज, खड्डा खुर्द, सिसवा गोपाल, पकड़ी बृजलाल, हथिया, तिनबरदहाँ, तुर्कही, डोमन छपरा, मन्सा छपरा, चमरडीहा, सखुई खास, सखुई खाफ, नौतार जंगल दरगौली, रामपुर गोनहीं और बोधी छपरा शामिल हैं।
कसया तहसील — 10.00 एकड़
कप्तानगंज तहसील — 26.60 एकड़
कप्तानगंज तहसील के ग्राम रामपुर बगहा की भूमि इसमें शामिल है।
कुल भूमि — 1503.57 एकड़
खतौनी में दर्ज होगी जमीन, फिर शुरू होगा आवंटन
प्रशासन के अनुसार राज्य सरकार में निहित की गई पूरी 1503.57 एकड़ भूमि को राजस्व अभिलेखों और खतौनियों में राज्य सरकार/सीलिंग मद में दर्ज कराने की कार्रवाई तत्काल शुरू की जा रही है।
इसके बाद सीलिंग से मुक्त कराई गई भूमि का नियमानुसार उपयोग किया जाएगा। क्षेत्र के अत्यंत गरीब, भूमिहीन किसानों और पात्र अनुसूचित जाति एवं जनजाति परिवारों को कृषि एवं आवासीय पट्टे दिए जाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
स्कूल अस्पताल समेत विकास कार्यों में भी होगी जमीन की उपयोगिता
सरकार के अधीन आई भूमि का इस्तेमाल केवल पट्टा देने तक सीमित नहीं रहेगा। प्रशासन के अनुसार आवश्यकता के अनुसार यहां अस्पताल, विद्यालय, खेल मैदान, आंगनवाड़ी केंद्र, पंचायत भवन और अन्य जनकल्याणकारी आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के लिए भी भूमि उपलब्ध कराई जा सकेगी।
अवैध कब्जा मिला तो होगी कार्रवाई
प्रशासन ने सीलिंग भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। यदि किसी व्यक्ति या भू-माफिया द्वारा सरकारी सीलिंग भूमि पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे नियमानुसार बेदखल किया जाएगा। साथ ही संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
इस तरह 44 वर्ष से चले आ रहे इस महत्वपूर्ण भूमि विवाद के निस्तारण के बाद अब हजारों गरीब और भूमिहीन परिवारों के लिए जमीन मिलने तथा क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों की उम्मीद बढ़ गई है।
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