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शिव महापुराण कथा में सुनाई बाणासुर के अहंकार की कथा
- दैनिक लोक भारती
- 19 Aug, 2026
शाहजहांपुर। आदर्श दिव्यांग कल्याण संस्थान की ओर से रामलीला मैदान खिरनी बाग में आयोजित शिव महापुराण कथा में कथा व्यास परम पूज्य संत प्रशांत प्रभु महाराज ने बाणासुर के अहंकार की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि बाणासुर प्रह्लाद का वंशज और राजा बलि का पुत्र था। वह भगवान शिव का परम भक्त था।
उसने हजारों वर्षों तक हिमालय की कंदराओं में तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया। भगवान शिव ने उसे हजार भुजाओं सहित अजेय होने का वरदान दिया। वरदान मिलने के बाद बाणासुर के भीतर अहंकार आ गया और वह युद्ध के लिए उतावला रहने लगा। कथा में बताया गया कि बाणासुर की पुत्री उषा ने स्वप्न में भगवान कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध को देखा और उनसे प्रेम करने लगी।
उसकी सहेली चित्रलेखा अनिरुद्ध को द्वारका से शोणितपुर ले आई। जानकारी होने पर बाणासुर ने अनिरुद्ध को नागपाश में बंदी बना लिया। इसकी जानकारी मिलने पर भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सेना के साथ शोणितपुर पहुंचे। बाणासुर की रक्षा का वचन भगवान शिव ने दिया था, जिसके कारण कृष्ण और भगवान शिव के बीच भीषण युद्ध हुआ।
युद्ध के दौरान कृष्ण ने बाणासुर की हजार भुजाओं में से अधिकांश को सुदर्शन चक्र से काट दिया। उसकी केवल चार भुजाएं बचीं तो भगवान शिव ने श्रीकृष्ण से उसके प्राण न लेने की प्रार्थना की। श्रीकृष्ण ने शिवजी की बात मानते हुए बाणासुर को जीवनदान दिया। इसके बाद बाणासुर को अपने अहंकार का एहसास हुआ और उसने उषा तथा अनिरुद्ध का विवाह करा दिया।
कथा व्यास ने कहा कि व्यक्ति कितना भी शक्तिशाली या बड़ा भक्त क्यों न हो, अहंकार आने पर उसका पतन निश्चित है। भगवान अपने भक्तों के कल्याण के लिए उनके अहंकार को नष्ट करते हैं। आरती-पूजन अवधेश मिश्रा, अक्षय तिवारी, श्रीदत्त शुक्ला, मुनेश्वर सिंह, रामचंद्र सिंघल, उद्योगपति अशोक गुप्ता, हरि शरण बाजपेई, विश्व मोहन बाजपेई, ठाकुर अखिलेश सिंह, गौरव त्रिपाठी और नीरज वाजपेई ने किया। आरती आचार्य विवेकानंद शास्त्री काशी बनारस ने संपन्न कराई।
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