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नासिक में श्रावण मास के दौरान सुंदरकांड पाठ, 21 पंडितों का हुआ सम्मान

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ब्रह्म समाज एसोसिएशन के संरक्षक संजीव चतुर्वेदी के आवास पर हुआ आयोजन, परिवारों ने लिया भजन-कीर्तन का आनंद

ब्राह्मण, राजपूत और उत्तर भारतीय समाज के लोगों ने परिवार सहित की सहभागिता

लोक भारती ब्यूरो

नासिक। श्रावण मास के अवसर पर ब्रह्म समाज एसोसिएशन नासिक के संरक्षक श्री संजीव चतुर्वेदी के निवास पर 27 अगस्त को सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। शाम छह बजे से रात 8:30 बजे तक चले कार्यक्रम में ब्राह्मण, राजपूत और उत्तर भारतीय समाज के लोग अपने परिवारों के साथ शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ सुंदरकांड पाठ और भजनों का आनंद लिया।

कार्यक्रम में श्री केके पांडेय की मंडली ने सुंदरकांड का पाठ किया। मंडली द्वारा भावपूर्ण तरीके से किए गए पाठ ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्तिमय वातावरण में बांधे रखा। इस दौरान मां गौरा-पार्वती और भगवान शिव से जुड़े भजनों का भी आयोजन हुआ, जिसमें परिवार के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।


सुंदरकांड पाठ के बाद हुआ महाप्रसाद

कार्यक्रम में श्री उमेश पांडेय, छोटे लक्ष्मी नारायण के महंत, भी उपस्थित रहे। सुंदरकांड पाठ के बाद आरती की गई। इसके पश्चात महाप्रसाद का आयोजन हुआ, जिसमें मौजूद लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

इस अवसर पर आयोजनकर्ता संजीव चतुर्वेदी ने 21 पंडितों को शाल और दक्षिणा प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में शामिल उत्तर भारतीय समाज के लोगों ने श्रावण मास में आयोजित इस मिलन समारोह को आपसी जुड़ाव और सामाजिक एकता का अवसर बताया।

प्रमुख लोगों की मौजूदगी ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा

कार्यक्रम में हिंदी परासरणी के अध्यक्ष कृपा शंकर सिंह, ब्रह्म समाज एसोसिएशन के अध्यक्ष जेपीएन पाठक, उपाध्यक्ष आरएन अवस्थी, अजय सिंह, एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुबोध मिश्रा, लोकेश दुबे, कर्नल एमएल शर्मा, कर्नल एसएन मिश्रा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

इसके अलावा गर्गोटी संग्रहालय, हिंदी परासरणी सभा और ब्रह्म समाज के संरक्षक केसी पांडेय की भी कार्यक्रम में उपस्थिति रही। आयोजन में बड़ी संख्या में परिवारों के शामिल होने से माहौल भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना रहा।

कार्यक्रम के अंत में भगवान भोलेनाथ और भगवान हनुमान के जयघोष के साथ आयोजन का समापन हुआ। उपस्थित लोगों ने इसे श्रावण मास में उत्तर भारतीय समाज के परिवारों के एक साथ आने और धार्मिक-सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने का अवसर बताया।

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