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गायत्री परिवार के लोगो ने रक्षा बंधन पर्व पर मनाया श्रावणी पर्व

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शाकिर अली

मिठौरा, महराजगंज। रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर गायत्री परिवार के लोगो ने  गायत्री शक्ति पीठ सिंदुरिया पर  श्रावणी पर्व मनाया। इस दौरान हिमाद्री दशसना, यज्ञोपवित परिवर्तन, वेद पूजन, बृक्षा रोपण, रक्षा बंधन का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

कथा वाचक रमाकांत पाठक  ने प्रवचन करते हुये बताया  जैसे सांप पुरानी केंचुली छोड़कर नई केचुली धारण करता है, ठीक उसी तरह पुराने पापकर्मों से मुक्त होकर जीवन को नए सिरे से प्रारंभ करने का पर्व है श्रावणी पर्व।

इस दौरान एकोहम बहुस्याम की आकांक्षा पूर्ण हुई थी। श्रावणी पर्व, ब्राह्मणत्व और ऋषित्व के अभिवर्धन का पर्व है।

श्रावण सुदी पूर्णमासी को श्रावणी का त्यौहार होता है। यह 'ज्ञान का पर्व' है। सज्ञान, विद्या, बुद्धि, विवेक और धर्म की बुद्धि के लिए इसे बनाया गया है। इसलिए इसे ब्राह्म पर्व भी कहते हैं।

वेद का प्रारंभ इस त्यौहार से किया जाता है। इस दिन से लेकर भाद्रपद बदी सप्तमी तक एक सप्ताह वेद प्रचार की प्रथा चिरकाल से प्रचलित है। प्राचीन काल में इस त्यौहार के अवसर पर गुरुकुलों में नये छात्र प्रवेश होते थे। जिनका यज्ञोपवीत नहीं हुआ, उन्हें यज्ञोपवीत दिये जाते थे।

गुरु शिष्य के परम पवित्र एवं अत्यन्त आवश्यक संबंध की स्थापना होती थी। वेद मन्त्रों से मंत्रित किया हुआ रक्षा सूत्र आचार्य लोग अपने शिष्यों के हाथ में बाँधते थे, यह सूत्र उनकी रक्षा करता था।

और उन्हें धर्म प्रतिज्ञा के बंधन में बाँधता था। बहिनें अपने भाइयों के हाथों राखी बाँध कर या भुजरियाँ (गेहूँ या जौ के दिन बढ़े हुए अंकुर) देकर भाइयों को यह याद दिलाती थीं कि बहिनों की रक्षा के लिए उनका क्या कर्त्तव्य है? भाई उसके बदले में उन्हें आश्वासन के रूप में कुछ उपहार देते थे । इस अवसर पर मंगरू गुप्ता, रमाशंकर चौधरी, श्यामानंद, बृज किशोर लाल श्रीवास्तव,

शंभू चौधरी, छोटे, पन्ना लाल, शंकर, बंशराज, छोटे मौर्य, रामफल गुप्ता, प्रदुम्मन चौधरी, वीरेश, अरविन्द दूबे आदि गायत्री परिवार के लोग उपस्थित रहे।

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