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किरन अध्यक्ष, राकेश ‘साहब’! पालिका में पति की सक्रियता पर सवाल, ईओ की जवाब ने बढ़ाई उलझन

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कुर्सी किरन की, हुक्म राकेश का! ‘ईओ बोलीं—‘सांसद प्रतिनिधि राकेश

 कुशीनगर। नगर पालिका परिषद कुशीनगर में अधिकारों की  तस्वीर दिलचस्प हो गई है। एक तरफ निर्वाचित अध्यक्ष किरन जायसवाल ने एसडीएम के निरीक्षण को असंवैधानिक मानते हुए नोटिस जारी कर दिया, दूसरी तरफ अध्यक्ष की कुर्सी के ठीक बगल बैठने वाले उनके पति राकेश जायसवाल की नगर पालिका के कामकाज में सक्रिय भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। पालिका के अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश देने से लेकर निर्माण कार्यों का मौके पर निरीक्षण करने तक उनकी मौजूदगी चर्चा में है।

मीडिया ने जब ईओ अंकिता शुक्ला से पूछा कि आखिर राकेश जायसवाल किस नियम या शासनादेश के तहत अध्यक्ष कक्ष में बैठते हैं, तो जवाब मिला “आपको जानकारी नहीं है, वह सांसद प्रतिनिधि हैं।” लेकिन किस सांसद के प्रतिनिधि हैं, इस सवाल पर ईओ ने कोई जवाब नहीं दिया।

ऐसे में एसडीएम को अध्यक्ष की ओर से दी गई नोटिस, जिलाधिकारी के 11 बिंदुओं पर जांच के आदेश और राकेश जायसवाल की कथित प्रशासनिक सक्रियता के बीच अब सवाल सिर्फ एक कुर्सी का नहीं है बल्कि सवाल यह है कि नगर पालिका में अधिकार की वास्तविक रेखा आखिर कहां खिंची है और उसे पार कौन कर रहा है?

बतादे कि राकेश जायसवाल, नगरपालिका परिषद के निर्वाचित अध्यक्ष किरन जायसवाल के पति हैं, यह पारिवारिक संबंध है। सवाल यह है कि वह किस अधिनियम, नियम अथवा शासनादेश के तहत नगर पालिका अध्यक्ष के कक्ष में अध्यक्ष की कुर्सी के बगल में अपनी कुर्सी लगाकर बैठते हैं और पालिका के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ प्रशासनिक भूमिका में दिखाई देते हैं?

जानकारों का कहना है कि राकेश जायसवाल सिर्फ अध्यक्ष पति होने के वजह से अध्यक्ष के कक्ष अध्यक्ष के कुर्सी के बगल मे अपनी कुर्सी लगाकर बैठते है तो यह पूरी तरह असंवैधानिक व घोर नियम विरुद्ध है और यदि वह किसी आधिकारिक पद अथवा प्रतिनिधि की हैसियत से बैठते हैं तो वह अधिकार किस किस नियम, अधिनियम व शासनादेश के तहत मिला है? यह वह सवाल है जिसका जवाब नगर पालिका प्रशासन को हर हाल मे सार्वजनिक करना चाहिए।



 ईओ ने कहा- सांसद प्रतिनिधि है राकेश जायसवाल  

अधिशासी अधिकारी अंकिता शुक्ला का यह कहना कि राकेश जायसवाल “सांसद प्रतिनिधि” हैं, मामले को और गंभीर बनाता है। किसी सांसद का प्रतिनिधि होना एक अलग पहचान है और नगर पालिका अध्यक्ष के पति होना अलग।

इसलिए अब सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि राकेश जायसवाल किस सांसद के प्रतिनिधि हैं।यदि कोई अधिकृत नियुक्ति है तो संबंधित सांसद का नाम, नियुक्ति पत्र, तारीख और जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए। क्योंकि पद है तो आदेश जरूरी है और आदेश है तो उसका रिकॉर्ड भी होना चाहिए।

लेकिन मीडिया के सीधे सवाल के बाद भी सांसद का नाम सामने नहीं आना अब अपने आप में चर्चा का विषय बन गया है।

अध्यक्ष प्रतिनिधि' से 'सांसद प्रतिनिधि' तक! असली पहचान कौन ?

राकेश जायसवाल की भूमिका को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। कहीं उन्हें अध्यक्ष का प्रतिनिधि बताया जाता है तो अब ईओ उन्हें सांसद प्रतिनिधि बता रही हैं।यदि वह अध्यक्ष के प्रतिनिधि हैं तो किस नियम के तहत? और यदि सांसद प्रतिनिधि हैं तो किस सांसद के?

यदि दोनों हैं तो दोनों नियुक्तियों के आदेश कहां हैं, और अगर कोई लिखित नियुक्ति नहीं है तो सरकारी कार्यालय में उनकी भूमिका क्या है?एक व्यक्ति, दो पहचान और दोनों के अधिकार का दस्तावेज गायब यही इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

शिलापट्ट पर पति का नाम, कक्ष में पति की कुर्सी

राकेश जायसवाल की भूमिका को लेकर सवाल इसलिए भी गहरा रहे हैं क्योंकि नगर पालिका के विकास कार्यों के शिलापट्टों पर अध्यक्ष का नाम "किरन जायसवाल" होने के बावजूद "किरन राकेश जायसवाल" लिखे जाने पर पहले से सवाल उठ चुके हैं।उस मामले में ईओ अंकिता शुक्ला ने इसे "प्रचलन" बताया था।

अब अध्यक्ष कक्ष में अध्यक्ष की कुर्सी के ठीक बगल में राकेश जायसवाल की कुर्सी और फिर उन्हें सांसद प्रतिनिधि बताया जाना इन दोनों घटनाओं ने नगर पालिका के कामकाज को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ऐसे मे सवाल उठना लाजमी है कि क्या यह महज संयोग है या किसी स्थापित व्यवस्था का हिस्सा?अगर व्यवस्था है तो उसका नियम क्या है?अगर नियम है तो आदेश कहां है?

और अगर आदेश है तो सार्वजनिक क्यों नहीं?, सांसद प्रतिनिधि हैं तो कुशीनगर पालिका तक ही क्यों?

 जानकारों का कहना है कि यदि राकेश जायसवाल किसी सांसद के प्रतिनिधि हैं तो उनका दायित्व सिर्फ कुशीनगर नगर पालिका के दायरे में ही क्यों दिखाई देता है। कुशीनगर संसदीय क्षेत्र में आने वाली दूसरी नगर पालिकाएं और नगर पंचायतें भी हैं। वहां भी केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से विकास कार्य होते हैं। तो क्या राकेश जायसवाल वहां भी निर्माण कार्यों का निरीक्षण करते हैं?

क्या वहां के अधिकारियों के साथ भी इसी तरह बैठते हैं?

क्या वहां भी उन्हें सांसद प्रतिनिधि के रूप में जाना जाता है?यदि नहीं, तो कुशीनगर नगर पालिका में उनकी विशेष सक्रियता का आधार क्या है?

 ईओ के साथ निर्माण स्थलों पर निरीक्षण, तस्वीरें सोशल मीडिया पर

राकेश जायसवाल की भूमिका को लेकर सवाल सिर्फ मौखिक चर्चाओं पर आधारित नहीं हैं। उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी तस्वीरें भी अपलोड की गई हैं, जिनमें वह नगर में चल रहे निर्माण कार्यों का ईओ के साथ मौके पर निरीक्षण करते दिखाई देते हैं।

अब सवाल यह है कि यदि वह नगर पालिका के अधिकारी नहीं हैं तो इन सरकारी निर्माण कार्यों के निरीक्षण में उनकी भूमिका क्या है?क्या वह अधिकृत निरीक्षण टीम का हिस्सा है?क्या उनके निरीक्षण का कोई सरकारी रिकॉर्ड तैयार हुआ?क्या उनकी टिप्पणी या निर्देश किसी सरकारी फाइल का हिस्सा बने?

यदि नहीं, तो फिर सरकारी निर्माण स्थल पर उनकी भूमिका किस हैसियत से थी और है?

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