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राप्ती पर बने बांध खतरे में, तबाही के मुहाने पर कई गांव

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श्रावस्ती।नेपाल की पहाड़ियों में हो रही मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने सीमांत इलाकों में दहशत बढ़ा दी है। नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में भी राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के सामने खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी के किनारे बने सुरक्षा तटबंध कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हैं और तेज बहाव की स्थिति में इनके टूटने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में मिश्रपुरवा, मधवापुर और सर्रा समेत कई गांवों के ग्रामीण भय के साये में हैं।ग्रामीणों के मुताबिक, राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच तटबंधों की हालत चिंता बढ़ाने वाली है। कई स्थानों पर बांध कटे हुए हैं, जबकि कुछ जगहों पर मिट्टी का कटाव लगातार जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नेपाल की पहाड़ियों में बारिश के बाद अचानक पानी का दबाव बढ़ा तो कमजोर तटबंध बड़ी तबाही का कारण बन सकते हैं।बताया गया कि शनिवार सुबह राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान 127.70 मीटर से करीब 30 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया था। हालांकि शाम करीब चार बजे के बाद जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई और नदी खतरे के निशान से करीब 50 सेंटीमीटर नीचे बहने लगी। जलस्तर में गिरावट से फिलहाल कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन तटबंधों की स्थिति को लेकर ग्रामीणों की चिंता बरकरार है।


बांध कटने से ग्रामीणों में दहशत

स्थानीय ग्रामीण बलई का कहना है कि बांध कई जगहों से कटा पड़ा है। उनका कहना है कि नेपाल में दोबारा पानी बढ़ा और राप्ती का बहाव तेज हुआ तो मिश्रपुरवा, मधवापुर और सर्रा सहित आसपास के गांवों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत नहीं हुई तो बाढ़ का पानी आबादी में प्रवेश कर सकता है।हर साल बाढ़ की मार झेलने वाले ग्रामीणों के लिए राप्ती का बढ़ता जलस्तर किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आने के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय होता है, लेकिन उससे पहले कमजोर तटबंधों को मजबूत करने की जरूरत है।


प्रशासन का दावा-तटबंध सुरक्षित

जिला प्रशासन का कहना है कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग के अनुसार जिले के सभी तटबंध सुरक्षित हैं और बाढ़ से बचाव के लिए संबंधित विभाग युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से बाढ़ चौकियों, राहत एवं बचाव की तैयारियों और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के दावे किए जा रहे हैं।फिलहाल राप्ती के जलस्तर में आई गिरावट ने प्रशासन और ग्रामीणों को कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन नेपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहने की स्थिति में नदी का जलस्तर फिर बढ़ सकता है। ऐसे में तटबंधों की वास्तविक स्थिति और उनकी निगरानी आने वाले दिनों में बेहद अहम होगी।

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