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शाहजहांपुर में पराली जलाने पर 30 हजार तक जुर्माना, जेल की भी चेतावनी; कंबाइन सीज करने के निर्देश

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डीएम धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने दिए सख्त निर्देश, पराली और गन्ने की पत्ती जलाने वाले किसानों पर होगी कार्रवाई

गन्ने का सट्टा निरस्त करने के साथ सरकारी खरीद, खाद-बीज और कृषि योजनाओं के लाभ से भी किया जा सकता है वंचित

आरिफ सिद्दीकी

शाहजहांपुर। जिले में पराली और फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में पराली प्रबंधन को लेकर जनपद स्तरीय समिति की बैठक हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को किसानों को जागरूक करने के साथ पराली जलाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

पिछले साल सेटेलाइट से सामने आई थीं 139 घटनाएं

प्रशासन के अनुसार, पिछले वर्ष सेटेलाइट के माध्यम से जिले में पराली जलाने की 139 घटनाएं चिन्हित हुई थीं। इन मामलों में संबंधित किसानों से जुर्माना वसूलने के साथ गन्ने का सट्टा निरस्त करने और लेवी पर धान खरीद से प्रतिबंधित करने की कार्रवाई की गई थी। जिलाधिकारी ने कहा कि इस वर्ष भी पराली जलाने की घटनाओं पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

डीएम ने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में रात्रि चौपाल आयोजित कर किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान, सचिव, लेखपाल और अन्य क्षेत्रीय कर्मचारियों की मौजूदगी में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के विकल्पों की जानकारी दी जाए।


पराली जलाने पर 30 हजार तक जुर्माना, जेल की चेतावनी

जिलाधिकारी ने किसानों से फसल अवशेष नहीं जलाने की अपील करते हुए कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की ओर से पराली प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों पर ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है।

प्रशासन की ओर से किसानों को चेतावनी दी गई है कि पराली जलाने पर 30 हजार रुपये तक जुर्माना वसूलने के साथ विधिक कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पराली या गन्ने की पत्ती जलाने वाले किसानों के गन्ने का सट्टा निरस्त किया जा सकता है। इसके अलावा सरकारी धान खरीद, खाद, बीज और कृषि विभाग की अन्य योजनाओं के लाभ से वंचित किए जाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

पराली गौशालाओं में भेजने और खाद लेने की व्यवस्था

जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों द्वारा एकत्र की गई पराली को उठवाकर गौशालाओं तक पहुंचाया जाए। किसानों को पराली के उपयोग के लिए पशुपालन विभाग की 'पराली दो, खाद लो' योजना का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया गया।

इस योजना के तहत किसान अपनी नजदीकी गौशाला में पराली देकर उसके बदले खाद प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि पराली जलाने के बजाय उपलब्ध सरकारी सुविधाओं और कृषि यंत्रों का इस्तेमाल करें।

बिना SMS यंत्र के धान कटाई करने वाली कंबाइन होगी सीज

जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि SMS यंत्र के बिना धान की कटाई करने वाली कंबाइन मशीनों को सीज किया जाए। पराली जलाने के मामलों में विधिक कार्रवाई के साथ संबंधित किसानों को मिलने वाले सरकारी लाभों को रोकने की कार्रवाई के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी उत्कर्ष द्विवेदी, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार, उप कृषि निदेशक पीके मिश्रा समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी, एसडीएम, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

 

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