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नई कमान, नया जोश... पोस्टरों ने फिर पूछ लिए पुराने सवाल
- दैनिक लोक भारती
- 21 Sep, 2026
धर्मेश गंगवार के स्वागत में दिखा शक्ति प्रदर्शन, 2027 की तैयारी का दावा; पोस्टरों में कुछ चेहरे गायब तो ‘अपनों’ के बीच ही उठने लगे सवाल
शोएब खान
पीलीभीत। समाजवादी पार्टी में जिलाध्यक्ष की कुर्सी बदली तो स्वागत में जोश भी खूब दिखा। करीब पांच साल तक संगठन की कमान संभालने वाले जगदेव सिंह जग्गा की जगह धर्मेश गंगवार को जिम्मेदारी मिलने के बाद सोमवार को उनका पीलीभीत में जोरदार स्वागत हुआ। बॉर्डर से पार्टी कार्यालय तक नारे, फूल-मालाएं और समर्थकों की भीड़ ने नई कमान के उत्साह की तस्वीर दिखाई। बैठक में 2027 के लिए बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और चारों विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को सक्रिय करने का संकल्प भी दोहराया गया।
लेकिन सियासत में कहानी सिर्फ मंच से बोले गए शब्दों से नहीं बनती, कभी-कभी दीवार पर चिपका पोस्टर भी कुछ सवाल छोड़ जाता है। स्वागत समारोह के बीच पार्टी कार्यालय में लगे पोस्टरों ने ऐसा ही किया। पोस्टरों में कई नेताओं और पदाधिकारियों के चेहरे नजर आए, लेकिन पार्टी के नौ उपाध्यक्षों में से मखदूम खान समेत तीन उपाध्यक्षों के फोटो दिखाई नहीं दिए। अब इसे महज डिजाइन की कमी माना जाए या संगठन की तस्वीर का संकेत—इस पर पार्टी के भीतर ही चर्चाएं शुरू हो गईं।
स्वागत में सब साथ, पोस्टर में कुछ ‘गायब’
दिलचस्प यह रहा कि मंच से एकजुटता का संदेश और 2027 की तैयारियों का दावा होता रहा, जबकि पोस्टर ने अपनी अलग ही ‘राजनीतिक भाषा’ बोल दी। नारे यह बता रहे थे कि सब एक साथ हैं और पोस्टर यह पूछता नजर आया कि आखिर कुछ चेहरे कहां हैं?
बेशक, किसी पोस्टर में फोटो का होना या न होना अपने आप में गुटबाजी का प्रमाण नहीं है। लेकिन जब संगठन में बदलाव के बाद पहला बड़ा स्वागत समारोह हो और उसी दौरान कुछ पदाधिकारियों के चेहरे न दिखें, तो सियासी गलियारों में सवाल उठना भी स्वाभाविक है।
नई कमान के सामने पुरानी चुनौती
धर्मेश गंगवार के सामने अब सिर्फ स्वागत समारोह की भीड़ को संगठन की ताकत में बदलने की चुनौती है। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना, चारों विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करना और अलग-अलग खेमों को साथ लेकर चलना उनकी बड़ी परीक्षा होगी।
क्योंकि चुनावी राजनीति में मंच पर एक साथ खड़े होना आसान है, असली तस्वीर तब सामने आती है जब बूथ पर कार्यकर्ता एक ही झंडे के नीचे खड़ा हो। फिलहाल नई कमान के स्वागत में जोश खूब दिखा है। अब देखना यह है कि पोस्टरों में छूटे चेहरे आने वाली बैठकों में नजर आते हैं या फिर संगठन की तस्वीर में यह ‘खाली जगह’ बनी रहती है।
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