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सीडीओ के औचक निरीक्षण में खुली महोलिया वीरान गौसंरक्षण केंद्र की व्यवस्था की पोल
- दैनिक लोक भारती
- 23 Sep, 2026
1048 गोवंशों के बीच चरनी में नहीं मिला पानी-भूसा, टूटी चरनी से परिसर में कीचड़ और गंदगी; निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
अंकित मिश्रा
खुटार, शाहजहांपुर। खुटार के महोलिया वीरान स्थित वृहद गौसंरक्षण केंद्र में मंगलवार को मुख्य विकास अधिकारी के औचक निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं में कई कमियां सामने आईं। केंद्र में कुल 1048 गोवंश संरक्षित मिले, जिनमें 485 गाय और 563 नन्दी बताए गए। इनकी देखभाल के लिए 25 गौपालक कार्यरत बताए गए हैं। इसके बावजूद निरीक्षण के दौरान नन्दी शेड की चरनी में पानी और भूसा उपलब्ध नहीं मिला।
मुख्य विकास अधिकारी ने 22 सितंबर को पशुधन अधिकारी अतुल कुमार सिंह की मौजूदगी में गौसंरक्षण केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान केंद्र में बड़ी संख्या में गोवंश पाए गए, लेकिन नन्दी शेड की चरनी में चारा-पानी की व्यवस्था नहीं मिली। इससे केंद्र में गोवंशों के लिए नियमित रूप से भूसा, चारा और पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था तथा उसकी निगरानी को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
टूटी चरनी से रिसता रहा पानी, परिसर में जमा मिला गोबर और कीचड़
निरीक्षण के दौरान चरनी टूटी हुई मिली। इससे पानी रिसने के कारण परिसर में कीचड़ और गोबर जमा था। इसके साथ ही मच्छरों का प्रकोप भी पाया गया। इतनी बड़ी संख्या में गोवंश वाले केंद्र में साफ-सफाई की स्थिति सामने आने के बाद पशुओं के स्वास्थ्य और केंद्र की नियमित निगरानी को लेकर भी पड़ताल की जरूरत महसूस हुई।
ग्राम पंचायत से विकासखंड स्तर तक निगरानी पर सवाल
गौसंरक्षण केंद्र की व्यवस्थाओं में ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव की भूमिका रहती है, जबकि विकासखंड स्तर पर संबंधित अधिकारियों द्वारा निगरानी और व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाती है। ऐसे में औचक निरीक्षण के दौरान चरनी में पानी-भूसा न मिलने, चरनी के क्षतिग्रस्त होने और परिसर में गंदगी पाए जाने के बाद निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि उपलब्ध निरीक्षण विवरण में किसी व्यक्ति को सीधे तौर पर दोषी नहीं ठहराया गया है। इसलिए जिम्मेदारी तय करने से पहले संबंधित स्तर पर जांच और तथ्यों की पुष्टि आवश्यक होगी।
सीडीओ ने दिए व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित जिम्मेदारों को गाय और नन्दी शेड की नियमित साफ-सफाई कराने, टूटी चरनी को तत्काल दुरुस्त कराने तथा गोवंशों के लिए पर्याप्त भूसा, हरा चारा और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
अब देखना यह है कि सीडीओ के निर्देश के बाद गौसंरक्षण केंद्र की व्यवस्थाओं में कितना सुधार होता है और 1048 गोवंशों की देखभाल से जुड़ी सामने आई कमियों की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाती है।
एक नजर में
- 485 गाय संरक्षित मिलीं
- 563 नन्दी पाए गए
- 1048 कुल गोवंश केंद्र में मिले
- 25 गौपालक कार्यरत बताए गए
- नन्दी शेड की चरनी में पानी और भूसा नहीं मिला
- टूटी चरनी से पानी रिसने पर कीचड़ जमा मिला
- परिसर में गोबर और मच्छरों का प्रकोप पाया गया
- सीडीओ ने साफ-सफाई, चारा-पानी और चरनी दुरुस्त कराने के निर्देश दिए
- ग्राम पंचायत से विकासखंड स्तर तक निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल,,
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