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सपा से नजदीकी या राजनीतिक दगाबाजी? भाजपा के संरक्षण में मलाई काटने वाले केसी शाक्य का ‘साइकिल’ प्रेम उजागर
- दैनिक लोक भारती
- 24 Sep, 2026
कई दलबदलू नेता सत्ता पक्ष को झटका देने को तैयार बैठे है,केवल वक्त का इन्तजार कर रहे है : सूत्र
परविन्दर प्रताप सिंह
बदायूं। सहानुभूति और संगठन के दम पर जिस परिवार को सत्ता का पूरा स्वाद चखाया गया, वही परिवार अब वफादारी की सीमाएं लांघता दिख रहा है। दातागंज/क्षेत्रीय राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब भारतीय जनता पार्टी की ब्लॉक प्रमुख विनीता शाक्य के देवर ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि केसी शाक्य अचानक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात करने पहुंचे। मुलाकात की तस्वीरें और सपा सांसद नीरज मौर्य के साथ क्षेत्र में उनका भ्रमण अब सत्ता के गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता पक्ष के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि शाक्य परिवार का राजनीतिक वजूद खड़ा करने में भाजपा का ही सबसे बड़ा हाथ रहा है।
भाजपा का हाथ, पूरे परिवार को मिला 'राजपाठ'
साल 2017 से भाजपा का दामन थामने वाले केसी शाक्य और उनके परिवार पर भाजपा संगठन व स्थानीय कद्दावर नेताओं ने अपरंपार मेहरबानी दिखाई थी।
भाभी को ब्लॉक प्रमुख बनाया: भाजपा विधायक राजीव कुमार सिंह उर्फ 'बब्बू भैया' और डीसीडीएफ चेयरमैन रवेन्द्र पाल सिंह ने पार्टी के कई वरिष्ठ व कद्दावर नेताओं को नजरअंदाज करते हुए विनीता शाक्य को पूरी ताकत से बीडीसी और फिर ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जितवाया।
पत्नी को प्रधानी: केसी शाक्य की पत्नी मुन्नी देवी को ग्राम प्रधान बनवाने में पार्टी की सीधी भूमिका रही।
पिता को चेयरमैन पद: पिता रमेश शाक्य को भूमि विकास बैंक का चेयरमैन बनवाकर सत्ता का हर शीर्ष पद इस परिवार की झोली में डाल दिया गया।
पाँच साल तक भाजपा की छत्रछाया में सत्ता की मलाई चाटने के बाद, अब 2026 आते-आते केसी शाक्य का भाजपा से 'मोहभंग' होना क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर रहा है।
वायरल वीडियो ने खोली पोल: "अब ये अपनी पार्टी में आ गए हैं"
हालांकि, केसी शाक्य अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद सफाई पेश करते नजर आ रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो उनकी राजनीतिक चालबाजी को बेनकाब कर रहा है। वीडियो में सपा सांसद नीरज मौर्य सार्वजनिक मंच से यह कहते सुने जा रहे हैं—
"केसी शाक्य अब अपनी पार्टी में वापस आ गए हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी से इनकी मुलाकात हो चुकी है और अब यह सपा को मजबूत करने का काम करेंगे।"
सपा सांसद का यह सार्वजनिक बयान और केसी शाक्य का उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर घूमना यह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी है, बस औपचारिक घोषणा बाकी है।
भाजपा संगठन की खामोशी पर उठते सवाल
इतना सब कुछ होने के बावजूद भाजपा संगठन का मूकदर्शक बने रहना आम कार्यकर्ताओं को अखर रहा है। जिन कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक करके इस परिवार को सत्ता के शिखर पर पहुंचाया, वे आज खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा संगठन इस राजनीतिक 'धोखेबाजी' पर कोई कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा या फिर यह खामोशी किसी बड़े तूफान से पहले की शांति है? आने वाले दिन यह तय करेंगे कि वफादारी की परीक्षा में अनुशासित कही जाने वाली भाजपा अपने ही गढ़ में क्या कदम उठाती है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार कुछ दलबदलू नेता वक्त का इन्तजार कर रहे है और सत्ता पक्ष को झटका देकर विपक्ष की गोद में बैठे दिखेंगे,अब देखते है इस दावे में कितनी सच्चाई है।
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