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उत्तम सत्य धर्म की आराधना में गूंजा संदेश- सत्य ही भगवान है, जीवन में उतारना जरूरी
- दैनिक लोक भारती
- 20 Sep, 2026
काकादेव चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में अभिषेक, मंगल पूजन और भक्तामर अर्चना हुई
पारसनाथ धाम में संगीतमय पूजन के साथ उत्तम सत्य धर्म पर प्रवचन, ज्ञान आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुआ
अरविन्द पाण्डेय
कानपुर। दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन जैन समाज के मंदिरों में उत्तम सत्य धर्म की भव्य आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ की गई। काकादेव स्थित चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर और सीसामऊ स्थित पारसनाथ धाम में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, आरती और प्रवचन सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रवचन में सत्य को केवल वाणी तक सीमित न रखकर विचार और आचरण में उतारने का संदेश दिया गया।
काकादेव मंदिर में अभिषेक और भक्तामर अर्चना
काकादेव स्थित चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म की आराधना की गई। अभिषेक का सौभाग्य श्री नरेश के सुपुत्र संजय जैन, गौरव जैन, आदित्य एवं अनुज जैन बृजवाला परिवार, हरीश जैन, रीमा जैन तथा नमेंद्र जैन, सरिता जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इसके बाद मंगल पूजन किया गया।
शाम सात बजे महाआरती का आयोजन हुआ। इसमें अनुराग जैन, अंकित जैन, राजेश जैन, सुधा जैन, सरोज जैन, अंशु जैन समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इसके बाद 48 माणिक दीपकों से भक्तामर अर्चना की गई।
पंडित कोमल चंद्र जैन ने बताया सत्य धर्म का महत्व
प्रवचन में पंडित कोमल चंद्र जैन ने कहा कि सत्य वचन ही धर्म का आधार है। उनके अनुसार सत्य दया धर्म का मूल कारण है और अनेक दोषों के निवारण में सहायक माना गया है। सत्यवादी व्यक्ति के आचरण में कपट जैसे दोषों का अभाव रहता है और समाज में उसके प्रति विश्वास का भाव बनता है।
उन्होंने कहा कि असत्य बोलने से व्यक्ति के प्रति विश्वास कम होता है और उसे निंदा तथा अविश्वास का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जीवन में सत्य धर्म का पालन करना श्रेष्ठ माना गया है।
पारसनाथ धाम में भगवान पारसनाथ का अभिषेक
सीसामऊ स्थित श्री 1008 पारसनाथ धाम में भी दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म की आराधना की गई। सुबह भगवान पारसनाथ का अभिषेक और शांतिधारा की गई। शांतिधारा करने वाले मुख्य पात्रों में श्री प्रदीप जैन और श्री सुनील जैन, संदेश जैन शामिल रहे।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ संगीतमय पूजन किया। मंदिर परिसर में पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण बना रहा।
‘सत्य ही भगवान है’ का दिया संदेश
श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर-जयपुर से पधारे पं. वीरेन्द्र जैन शास्त्री ने उत्तम सत्य धर्म पर प्रवचन किया। उन्होंने “जं सच्चं ते भगवं” का भाव बताते हुए कहा कि सत्य को भगवान के समान माना गया है।
उन्होंने कहा कि उत्तम सत्य का अर्थ मन, वचन और कर्म से सत्य का पालन करना है। सत्य केवल शब्दों में नहीं, बल्कि विचारों और व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। सत्य को जीवन में उतारने से आचरण में विनय आता है, मन की शुद्धि होती है और आपसी संबंधों में मधुरता बढ़ती है।
शास्त्री जी ने कहा कि सत्य अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाला प्रकाश है और व्यक्ति को उसके वास्तविक स्वरूप की ओर ले जाने का माध्यम बनता है।
महाआरती के बाद हुआ ‘कौन बनेगा ज्ञानपति’ कार्यक्रम
धार्मिक कार्यक्रमों के क्रम में भव्य आरती का आयोजन किया गया। इसके बाद ‘कौन बनेगा ज्ञानपति’ नाम से सांस्कृतिक एवं ज्ञान आधारित कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम पंडित कोमल चंद्र जैन और पं. वीरेन्द्र जैन शास्त्री के दिशा-निर्देशन में हुआ।
आयोजन में अनिल जैन, अजय जैन, त्रिभुवन चंद्र जैन समेत अन्य श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। दशलक्षण पर्व के पांचवें दिन दोनों मंदिरों में हुई आराधना के दौरान श्रद्धालुओं को सत्य, शुचिता और सदाचरण को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया गया।
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