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लविवि कुलपति ने 169 शिक्षकों को बांटा पदोन्नति का तोहफा

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 लखनऊ। पिछले दो दिनों से चल रही प्रमोशन की कमेटी के बाद शुक्रवार को तीसरे दिन लखनऊ विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक कुलपति प्रो जे पी सैनी, की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन स्थित मंथन हॉल में हुई। कार्य परिषद में लिए गए प्रमुख निर्णयों में वे 56 प्रोफेसर रहे, जिनको सुपर प्रोफेसर का दर्जा देते हुए करीब 12 से 15,000 रूपये की बढ़ोतरी करके उन्हें लेवल 15 का प्रोफेसर घोषित किया है। लविवि इतिहास के पन्नों पर अमर हो जाने के लिए कुछ खास प्रोफेसरों ने एक नया शिगूफा कुलपति प्रोफेसर सैनी के आने के बाद छोड़ा और उसके बाद विश्वविद्यालय में पहली बार सुपर प्रोफेसर बनाने की एक नोटिफिकेशन जारी हुई और शुक्रवार को इसे अमलीजामा पहनाकर ऐसे 56 लोगों को 15 लेवल वाला वेतनमान देते हुए सुपर प्रोफेसर का दर्जा दे दिया गया। पिछले 5 महीना से लगभग लगभग हर बैठक में कुलपति यह स्पष्ट रूप से कहते हैं कि विश्वविद्यालय के पास में फंड नहीं है पैसा नहीं है, वह वेतन बड़ी मुश्किल से दे पा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद कार्य परिषद में तोहफों की झड़ी लगाने से करीब 5 करोड़ रुपए से अधिक का सालाना व्यय भार होगा। जिसमें सुपर प्रोफेसर्स का 75 लाख रूपए भी शामिल है, जिन पर यह पैसे खर्च करके इतिहास के पन्नों में कुलपति सैनी ने अपना स्थान बनाया है। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रवक्ता मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि कार्य परिषद में कुल 169 शिक्षकों की पदोन्नति की गई, जो विश्वविद्यालय के 105 वर्षों के इतिहास में पहली बार हुआ है। इनमें 56 मास्टरों को वरिष्ठ/सुपर प्रोफेसर, 54 को प्रोफेसर, 15 को एसोसिएट तथा 44 मास्टरों को असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नति की रेवड़ी बांटी है।



वीके शर्मा को सुपर प्रोफेसर बनाने पर उठे सवाल 
लखनऊ। सत्र लाभ पाने वाले मास्टरों को कभी भी लखनऊ विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार प्रशासनिक पद नहीं दिए जाते हैं लेकिन कुलपति पद का भार लेते ही प्रोफेसर सैनी ने केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के मास्टर वीके शर्मा को नियम विरुद्ध डीएसडब्ल्यू बनाए रखा, बाद में इस पद पर अमिता कनौजिया की नियुक्ति की गई। वैसे तो शर्मा पर मेहरबानी का सिलसिला आलोक राय शुरू करके गए थे लेकिन विनोद कुमार शर्मा पर नए कुलपति का भी दुलार जारी रहा। कार्य परिषद में विनोद कुमार शर्मा को सुपर प्रोफेसर का दर्जा भी देते हुए उनके इंक्रीमेंट और अन्य चीजों में बढ़ोत्तरी करते हुए 15 लेवल वाला सुपर प्रोफेसर नामित कर दिया। विश्वविद्यालय के सूत्र बताते हैं कि लविवि में ऐसा कोई नियम अथवा स्टेट्यूट में प्रावधान ही नहीं है। विश्वविद्यालय खुद ही इस नए नियम को 105 साल के इतिहास में नया बता रहा है, ऐसे में विश्वविद्यालय के गरीब छात्रों से फीस के रूप में वसूले गए पैसे की बर्बादी की जा रही है।

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