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विकास कार्यों की होगी जीआईएस टैगिंग

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लखनऊ। विकास कार्यों में पारदर्शिता और डुप्लीकेसी लाने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने जीआईएस टैगिंग सिस्टम लागू किया है। इसके अंतर्गत अवस्थापना निधि समेत विभिन्न मदों से किये जाने वाले विकास कार्यों का पूरा रिकॉर्ड एक क्लिक में उपलब्ध हो जाएगा। इससे टेंडरों में डुप्लीकेसी की संभावना खत्म होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। 
  एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के निर्देश पर पीएमसी (प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सेल) द्वारा जीआईएस पोर्टल पर इसका मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है, जिसका कार्य 80 प्रतिशत तक पूरा हो गया है। उपाध्यक्ष ने बताया कि पहले कई प्रकरणों में नगर निगम और एलडीए की ओर से एक ही काम के लिए अलग-अलग टेंडर जारी होने की स्थिति सामने आ चुकी है। नये जीआईएस पोर्टल के लागू होने के बाद ऐसी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी और किसी भी परियोजना की जानकारी डिजिटल प्लेटफार्म पर पहले से उपलब्ध रहेगी।
  इसके लिए पोर्टल पर हर विकास कार्य की जीआईएस टैगिंग करायी जा रही है। इसमें यह दर्ज होगा कि निर्माण कार्य कब शुरू हुआ, कब तक पूरा होना है, किस संस्था द्वारा कार्य कराया जा रहा है और उस पर कितनी लागत खर्च होगी। इसके साथ ही शहर के सभी जोनों में चल रहे विकास कार्यों का भी पूरा लेखा-जोखा ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि इस व्यवस्था से विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी। विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और एक ही परियोजना पर विभिन्न विभागों से अलग-अलग टेंडर जारी होने जैसे प्रकरणों पर प्रभावी रोक लगेगी। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अवस्थापना निधि से कराये गये समस्त विकास कार्यों की जीआईएस टैगिंग करा ली गयी है। अब अन्य कार्यों का डाटा भी मॉड्यूल पर अपडेट किया जा रहा है। 
जीआईएस पोर्टल पर तैयार हो रहा यह मॉड्यूल किसी भी विकास कार्य की जानकारी एक क्लिक पर देगा। इसके लिए जीआईएस पर अलग-अलग कलर कोड से टैगिंग करायी जा रही है। जिस वर्ष के कार्य का ब्योरा देखना होगा, उसके कलर कोड पर क्लिक करते ही पूरा डाटा सामने आ जाएगा। इससे विकास कार्यों की निगरानी भी आसानी से की जा सकेगी।

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