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फेक न्यूज के शोर में तथ्य ही पत्रकार की पहचान

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शोभित शुक्ला

 बाराबंकी। सोशल मीडिया के दौर में सूचना का प्रसार जितना तेज हुआ है, उतनी ही तेजी से भ्रामक सूचनाएं और फेक न्यूज भी लोगों तक पहुंच रही हैं। ऐसे में पत्रकार के लिए खबर की गति से ज्यादा उसकी विश्वसनीयता महत्वपूर्ण हो गई है। किसी भी सूचना को प्रसारित करने से पहले उसके स्रोत और तथ्यों की पुष्टि जरूरी है। इसी संदेश के साथ भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय (पीआइबी), लखनऊ की ओर से रविवार को कलेक्ट्रेट स्थित लोक सभागार में एक मीडिया कार्यशाला ‘वार्तालाप’ का आयोजन हुआ। जिसमें पत्रकारों को फेक न्यूज की पहचान, फैक्ट-चेकिंग और डिजिटल टूल्स के प्रयोग की व्यावहारिक जानकारी दी गई। साथ ही केंद्र सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों पर भी चर्चा हुई।


 फेक न्यूज वायरस की तरह, रोकना जरूरी : दिलीप शुक्ला

पीआइबी लखनऊ के निदेशक दिलीप कुमार शुक्ला ने कहा कि फेक न्यूज एक वायरस की तरह है। यह तेजी से फैलती है और समाज को प्रभावित कर सकती है। पत्रकारिता में तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि सबसे जरूरी है। पत्रकार यदि खबर प्रकाशित करने से पहले उसके स्रोत की जांच करें तो भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है। कार्यक्रम की शुरुआत पीआइबी निदेशक दिलीप कुमार शुक्ला ने जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह और प्रगतिशील किसान पद्मश्री रामशरण वर्मा का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत करने से की। पीआइबी प्रतिनिधि सुंदरम कुमार ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और प्रोफेसर मुकुल श्रीवास्तव का स्वागत किया। वहीं पीआइबी प्रतिनिधि दुष्यंत शर्मा ने जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. राजीव सिंह और पीआइबी निदेशक का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।


 किसान उत्पादन के साथ बाजार पर भी दें ध्यान : रामशरण वर्मा

मुख्य अतिथि पद्मश्री रामशरण वर्मा ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में किसान की भूमिका महत्वपूर्ण है। कृषि नीति का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसान की आय, सुरक्षा, सिंचाई और बाजार तक पहुंच मजबूत करना भी होना चाहिए। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए फसल चक्र अपनाने और एक साथ तीन प्रकार की खेती करने की सलाह दी। उन्होंने खास तौर पर ढैंचा की खेती और गोबर की खाद के प्रयोग पर जोर दिया। कहा कि किसान का ध्यान केवल उत्पादन पर नहीं, बल्कि अच्छे बीज और बाजार पर भी होना चाहिए। सही बीज, बेहतर उत्पादन और उचित बाजार किसान की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 शिक्षा युवाओं को बनाएगी नौकरी देने वाला : नवीन कुमार पाठक

बीएसए नवीन कुमार पाठक ने कहा कि विकसित राष्ट्र और पांच ट्रिलियन इकोनामी का लक्ष्य शिक्षा के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है। आज शिक्षा युवाओं को केवल डिग्री नहीं देती, बल्कि स्किल प्रदान कर उन्हें बाजार के लिए तैयार करती है। उन्होंने कहा कि युवा नौकरी करने के साथ-साथ नौकरी देने वाला भी बने, इसके लिए कौशल आधारित शिक्षा जरूरी है।उन्होंने बताया कि जिले के 12 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास संचालित हो रही हैं। वहीं 1192 विद्यालयों की मरम्मत कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि तकनीक और बेहतर शैक्षिक संसाधनों से विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सकता है।पत्रकार केंद्र सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी आमजन तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। तथ्यपरक जानकारी से पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद मिलती है।

स्वस्थ शरीर से स्वस्थ समाज का निर्माण : डॉ. राजीव सिंह

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. राजीव सिंह ने कहा कि स्वस्थ शरीर ही स्वस्थ समाज की नींव है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया। कहा कि सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने में पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पत्रकार अपने समाचारों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों को भी सामने लाते हैं, जिससे व्यवस्थाओं में सुधार का रास्ता खुलता है।

 एआई आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती : मुकुल श्रीवास्तव

लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर मुकुल श्रीवास्तव ने पत्रकारों को वायरल फोटो, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट की सत्यता जांचने के व्यावहारिक तरीके बताए। उन्होंने स्रोत की पुष्टि करने, तस्वीर और वीडियो के पुराने होने की जांच करने तथा डिजिटल टूल्स के माध्यम से फैक्ट-चेकिंग की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने कहा कि डिजिटल पत्रकारिता के दौर में तकनीक के साथ तथ्य-जांच का कौशल भी जरूरी है। पत्रकारों के सवाल जवाब में उन्होंने माना कि पत्रकारिता के लिए एआई तकनीक आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

 शायरी से जागरूकता का संदेश

कार्यक्रम का संचालन ग्रेट इंडिया लाफ्टर चैलेंज के प्रतिभागी राजेंद्र विश्वकर्मा हरिहर ने किया। उन्होंने मंच संचालन के दौरान बीच-बीच में शायरी के माध्यम से प्रेरक और जागरूकता से जुड़े संदेश दिए। उनकी शायरी ने गंभीर विषयों के बीच कार्यक्रम को रोचक बनाए रखा और पत्रकारिता में सत्य, जिम्मेदारी तथा जागरूकता का संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचाया।

 वार्तालाप’ जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से होने चाहिए : डीएम

जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के पत्रकारों के बीच फेक न्यूज को लेकर जागरूकता फैलाने की पीआइबी की पहल सराहनीय है। ‘वार्तालाप’ जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से होने चाहिए, ताकि पत्रकार बदलते डिजिटल परिदृश्य के अनुरूप नई तकनीकों और तथ्य-जांच के तरीकों से परिचित होते रहें। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय पत्रकारिता लोकतंत्र और समाज दोनों को मजबूत करने का काम करती है।यह संस्करण प्रिंट अखबार में इस्तेमाल करने के लिए ज्यादा कसा हुआ, प्रवाहपूर्ण और सकारात्मक रखा गया है।

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