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इंटरलॉकिंग सड़क में पुरानी ईंटों का खेल, नगर पालिका की खुली पोल

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सड़क के लिए 85 लाख की स्वीकृत है धनराशि, सड़क से निकली गई पुरानी सीमेंटेड ईंटों से हो रहा 900 मीटर सड़क का निर्माण।

 निर्माण स्थल पर बिना सूचना बोर्ड के 8 महीने से चल रहा निर्माण का खेल।

 नगर वासियों का आरोप है कि अच्छी सड़क को उखाड़कर सरकारी धन का किया जा रहा है बंदरबांट।

मोहम्मद नईम

कुशीनगर। नगर पालिका परिषद कुशीनगर की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों की पोल अब खुलकर सामने आने लगी है। भ्रष्टाचार और मिलीभगत का आलम यह है कि शहर में जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई और सरकारी धन का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। वार्ड नंबर 13 राम जानकी नगर में मठ मंदिर गेट से 900 मीटर लंबी इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण कार्य इन दिनों भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के साए में चल रहा है। लगभग 85 लाख रुपये की भारी-भरकम स्वीकृत धनराशि से होने वाले इस कार्य में मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और ठेकेदार तथा नगर पालिका प्रशासन की कथित साठगांठ से सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है।


 मानकों को ताक पर रखकर हो रहा है निर्माण, पुरानी ईंटों से चल रहा है काम:-

नियमानुसार किसी भी सरकारी सड़क निर्माण में उच्च गुणवत्ता की नई सामग्री का प्रयोग होना अनिवार्य है, ताकि वह लंबे समय तक टिक सके। लेकिन कुशीनगर के राम जानकी नगर में जो तस्वीर सामने आ रही है, वह बेहद चौंकाने वाली है। इस 85 लाख की परियोजना के तहत सड़क का आधा निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि सड़क से निकाले गए पुराने सीमेंटेड ईटों का ही दोबारा धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।

भ्रष्टाचार के इस खेल को छिपाने और खानापूर्ति करने के लिए बीच-बीच में केवल नई लाल ईंटों की एक-एक पट्टी सजा दी जा रही है, ताकि ऊपर से सब कुछ ठीक-ठाक लगे। इस प्रकार की लीपापोती सीधे तौर पर सरकारी धन के बड़े पैमाने पर बंदरबांट की कहानी बयां कर रही है। निर्माण की यह घटिया गुणवत्ता और मनमानी सीधे तौर पर नगर प्रशासन के दावों की पोल खोल रही है।

 बिना बोर्ड के चल रहा है निर्माण, पारदर्शिता पूरी तरह गायब:-

नियमानुसार किसी भी विकास कार्य स्थल पर विभाग द्वारा एक सूचना बोर्ड लगाया जाना अनिवार्य होता है, जिस पर योजना का नाम, लागत, ठेकेदार का नाम, कार्य प्रारंभ होने की तिथि और कार्य पूर्ण होने की अंतिम तिथि स्पष्ट रूप से अंकित होनी चाहिए। लेकिन इस महत्वपूर्ण 900 मीटर लंबी सड़क के निर्माण स्थल पर ऐसा कोई भी बोर्ड चस्पा नहीं किया गया है। आखिर इस बात को क्यों छिपाया जा रहा है कि यह कार्य कब शुरू हुआ और इसे कब तक पूरा होना था? इसी का नतीजा है कि पिछले 8 महीनों से यह सड़क निर्माण कछुआ चाल से चल रहा है और जनता को यह तक पता नहीं है कि इस भ्रष्टाचार भरे निर्माण की आधिकारिक समय-सीमा क्या है।

 पहले से ठीक थी सड़क, फिर क्यों उखाड़कर की जा रही है धन की बर्बादी?:-

स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों के बीच इस बात की चर्चा आम है कि जिस सड़क को उखाड़कर नए सिरे से बनाया जा रहा है, वह पहले से ही काफी हद तक ठीक और आवागमन योग्य थी। इसके बावजूद, एक सही-सलामत सड़क को सुनियोजित तरीके से उखाड़ा गया और फिर वही पुरानी सामग्रियां इस्तेमाल कर जनता के धन का दुरुपयोग किया गया। जबकि नगर के कई वार्डों में कच्ची सड़क है, नाली तक की सुविधा नहीं है, उसपर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आठ महीने से खिंच रही इस निर्माण प्रक्रिया ने स्थानीय जनता के मन में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

 नगर अध्यक्ष और ठेकेदार की सांठगांठ की चर्चा जोरों पर:-

​शहर में इस बात की चर्च काफी जोरो पर है कि कागजों में भले ही किसी अन्य ठेकेदार का नाम हो, लेकिन परदे के पीछे इस पूरे निर्माण कार्य की डोर नगर अध्यक्ष के इशारे पर ही चल रही है। एक मोहरे के रूप में ठेकेदार को आगे करके जनता के पैसों का यह खेल खेला जा रहा है। हालांकि, इसमें कितनी सच्चाई है, यह तो निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच के बाद ही पता चल पाएगा, लेकिन वर्तमान हालात यह चीख-चीख कर कह रहे हैं कि कुशीनगर में विकास केवल कागजों पर ही हो रहा है और धरातल पर केवल लूट मची है।

 जांच और कार्रवाई की उठी मांग:-

राम जानकी नगर की जनता और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस 85 लाख की परियोजना की तत्काल प्रभाव से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। निर्माण कार्य में इस्तेमाल हो रही घटिया और पुरानी सामग्रियों के सैंपल की जांच हो तथा सरकारी धन के इस तरह से हो रहे दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो जनता का प्रशासन से पूरी तरह भरोसा उठ जाएगा।

 अधिशासी अधिकारी बोली:-

इस संबंध में जब अधिशासी अधिकारी अंकिता शुक्ला से निर्माण में सड़क से निकले गए पुराने ईट लगने के सवाल पर उन्होंने ने बताया कि इस निर्माण को लेकर पूरी जानकारी नहीं है, निर्माण से संबंधित पत्रावली मंगवाकर दिखवाती हूं, हालांकि सड़का अच्छी थी कि सवाल पर कहा कि मैं इस सड़क से गई हूं, सड़क ठीक नहीं थी, खराब सड़क देखकर ही कार्य कराया जाता है।

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