आज की ताजा खबर

राजधानी के किस होटल में छुपे हैं तथा कथित मैनेजर?, 22 जुलाई से पुलिस को नहीं मिल रहा है लेकिन प्रिंसिपल करवा ले रहे हस्ताक्षर

top-news

आखिर राजधानी के किस होटल में छिपे हैं आनंद मोहन तिवारी?, 10 और 14 अगस्त को लगा था मुकदमा

लखनऊ। दंगा, मारपीट, बलवा और जान से मारने की धमकी देने समेत नौ गंभीर धाराओं में वांछित डीएवी के तथाकथित मैनेजर आनंद मोहन तिवारी वेतन बिल पर तो साइन कर रहे हैं, लेकिन पुलिस को ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।

नाका थाने में जिन धाराओं में मुकदमे आनंद मोहन तिवारी के ऊपर दर्ज है, उसमें 3 महीने से लेकर 07 वर्ष तक की जेल या जुर्माना या दोनों है, लेकिन फिर भी वह आराम से न केवल कॉलेज के वेतन बिल पर साइन कर रहा है बल्कि हाईकोर्ट में अपने मुकदमे की पैरवी भी कर रहा है।


 पिछले महीने 07 जुलाई को डीएवी कॉलेज के मैनेजमेंट की संपत्तियों पर कब्जा करने की नीयत से जो कांड आनंद मोहन तिवारी ने अधिवक्ता के वेश में आए कुल डेढ़, दो-सौ लोगों के साथ किया, उसके एवज में उनके ऊपर दो दिनों में दो मुकदमे नाका थाने में दर्ज हुए, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीत चुका है उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

 गोमती नगर के उनके आवास पर पुलिस गई लेकिन उन्हें नहीं ढूंढ पाई ऐशबाग स्थित कालेज परिसर भी पुलिस पहुंची लेकिन ताला देखकर लौट आई। 15 दिन की छुट्टी लेकर उनके दो कलर्क जितेंद्र कुमार सिंह और गजेंद्र पाल सिंह भी फरार हैं लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही है, जबकि इस पूरे प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट के सीनियर जस्टिस ने लखनऊ पुलिस को उच्च न्यायालय के कोर्ट में बुलाकर फटकार लगाई थी।

और यह पूरा मामला दूसरे थाने भी स्थानांतरित कर दिया गया है, इसके बाद भी तथाकथित मैनेजर आनंद मोहन तिवारी न केवल कॉलेज के वेतन बिल पर हस्ताक्षर कर रहा है बल्कि हाईकोर्ट में अपने मुकदमे की पैरवी भी कर रहा है।

अपने ऊपर लगे दो मुकदमों के मामले में सीआरएलपी 7904/2026 को 4 अगस्त को केस फाइल किया गया था, जिसमें नाका थाने द्वारा दर्ज किए गए नौ संगीन धाराओं - 191(2), 191(3), 190, 127(2), 329(3), 324(4), 115(2), 131, 351(3) को लेकर आनंद मोहन तिवारी ने क्रिमिनल केस की रिट फाइल करायी थी।

जबकि इस केस का रजिस्ट्रेशन 6 अगस्त को हुआ था। यही नहीं इस मामले की सुनवाई जब 10 अगस्त को हुई तो इसे नॉट प्रेस करते हुए मुकदमा ही डिस्पोज ऑफ करा दिया गया है जबकि दूसरा मुकदमा 14 अगस्त को फिर लगा हुआ था, इसमें भी इन्हीं कोई राहत नहीं मिली। सूत्र बताते हैं कि आनंद मोहन तिवारी राजधानी के किसी होटल में छुपा बैठा है और मजे से सारे काम निपटा रहा है।

कॉलेजों से लाखों रुपए की वसूली होती है और उसी पैसे से वह ऐश कर रहा है। रविवार को कालेज में होने वाली प्रतियोगी परीक्षा में भी गोलमाल करके पैसे उगाहे जा रहे हैं। इस मामले में जब डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव कुमार त्रिपाठी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वेतन बिल पर सिग्नेचर कराने के लिए पेपर्स तथाकथित मैनेजर आनंद मोहन तिवारी के घर भेज दिए गए थे, तो वहीं इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल संजय मिश्रा का भी यही कहना है कि वेतन बिल पर सिग्नेचर करने के लिए पहले से चल रहे नियम के तहत घर भिजवा दिया गया था जहां से सिग्नेचर होकर विभाग को चला गया था और बाद में फिर वेतन पास हो गया जो सभी कर्मचारियों के खाते में आया है उन्होंने बताया कि उनके यहां एडेड इंटर कॉलेज में करीब 45 कर्मचारी और शिक्षक कार्यरत हैं।

https://lokbharti.co.in/ad/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *