आज की ताजा खबर

सरकार ने जारी किया राष्ट्रीय ऊर्जा नीति 2026 का मसौदा, मुफ्त बिजली और क्रॉस-सब्सिडी समाप्त करने का लक्ष्य

top-news

नई राष्ट्रीय ऊर्जा नीति (एनईपी-2026) में बिजली वितरण कंपनियों (डिस्काम) की खराब वित्तीय स्थिति सुधारने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। नीति का उद्देश्य डिस्काम को लगातार बढ़ते कर्ज के चक्र से बाहर निकालना और बिजली क्षेत्र को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना है। इसके लिए लागत-आधारित टैरिफ प्रणाली को लागू करने पर जोर दिया गया है।

नीति में अत्यधिक क्रॉस सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की योजना है। एक उपभोक्ता वर्ग पर दूसरे वर्ग का बोझ डालने से टैरिफ असंतुलन पैदा होता है, जिससे डिस्काम की आय प्रभावित होती है और घाटा बढ़ता है।

एनईपी-2026 के अनुसार, यदि कोई राज्य सरकार बिजली पर सब्सिडी देना चाहती है, तो उसके लिए बजट में पहले से प्रावधान करना अनिवार्य होगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी का बोझ सीधे डिस्काम पर न पड़े और उनकी नकदी स्थिति पर नकारात्मक असर न हो।

एनईपी-2005 में भी आपूर्ति लागत की वसूली और लक्षित सब्सिडी का प्रावधान था, लेकिन व्यावहारिक रूप से टैरिफ को आपूर्ति लागत से कम रखा गया। इसके चलते डिस्काम लगातार घाटे में चली गईं और कर्ज के जाल में फंसती रहीं।

देश की सभी डिस्काम पर कुल कर्ज 7.18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि इनकी कुल हानि 6.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। नीति निर्माताओं का मानना है कि लागत-आधारित टैरिफ और पारदर्शी सब्सिडी व्यवस्था से ही डिस्काम की वित्तीय सेहत बहाल की जा सकती है।

एनईपी-2026 का समग्र लक्ष्य यह है कि सब्सिडी और टैरिफ असंतुलन को दूर करके डिस्काम को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना और देश में बिजली आपूर्ति को दीर्घकालिक, टिकाऊ और भरोसेमंद बनाना है।

https://lokbharti.co.in/ad/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *