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अधियाचित पद के शिक्षक का वेतन निकालने को हुआ खेल

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 लखनऊ। राजधानी के ऐडेड कॉलेज में डीआईओएस मनमाने ढंग से कुछ भी कर सकता है और फिर जब अधिकारी राकेश कुमार जैसा भ्रष्ट हो तो कुछ भी संभव था। यही कारण था कि राकेश कुमार भले ही अब ट्रांसफर के चलते राजधानी से भगा दिया गया हो लेकिन पिछले 5 वर्षों तक किए गए उसके भ्रष्टाचार उसकी याद रोजाना दिला रहे हैं। अधियाचित पद पर ऑफलाइन माध्यम से हुए श्रीकृष्ण त्रिवेदी के ट्रांसफर के बाद प्रथम वेतन भुगतान के लिए जब प्रिंसिपल विवेकानंद मिश्रा ने साइन नहीं किया तो भ्रष्ट राकेश कुमार ने आयोग से चयनित प्रिंसिपल के ही हस्ताक्षर अमान्य कर दिए। यही नहीं उसने जूनियर शिक्षक बृजेश बर्नवाल के हस्ताक्षर से वेतन जारी करा लिया। कहानी में ट्विस्ट इतना ही नहीं था, जब प्रिंसिपल विवेकानंद मिश्रा ने इस बात की शिकायत मुख्यमंत्री से करने की धमकी दी तो राकेश कुमार फिर पलट गया और उसने 04 मई 2026 को एक आदेश के साथ प्रिंसिपल विवेकानंद मिश्रा के हस्ताक्षर को फिर से मान्य कर दिया लेकिन इस आदेश को उसने जानबूझकर लेखाधिकारी को नहीं दिया, जिसका खामियाजा यह हुआ कि एक महीने बाद तक इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज का मैनेजर और प्रिंसिपल दोनों मनमानी करते हुए आयोग से चयनित प्रिंसिपल का वेतन रोक के बैठ गए हैं। 
एक सप्ताह पहले तक राजधानी में तैनात रहा जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश भ्रष्टाचार के चलते हर काम को इतना फंसा कर गया है कि न केवल उसके पद पर आने वाले अधिकारी को दिन में चक्कर आ रहे हैं बल्कि पूरे शहर भर के शिक्षक और प्रिंसिपल परेशान है। राकेश कुमार पांड़े के लिए राजधानी के 100 ऐडेड कॉलेज कमाई के केंद्र बन गए थे। डीआईओएस को पता है कि शिक्षकों को परेशान करने से ही मैनेजर खुश होगा और इसी से रकम जनरेट होगी तो ऐसी स्थिति में पूरा कार्यालय एक सूत्रीय भ्रष्टाचार के कार्यक्रम में लगा हुआ था।
भले ही माध्यमिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का समूल नाश करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिन-रात एक किये हुए हैं लेकिन इस विभाग में बड़े पदों पर बैठे पीईएस अधिकारी नियमों को अपनी जागीर समझते हैं, यही कारण है कि आधे से अधिक एडेड कॉलेज में पढ़ाई नहीं हो पाती और प्रिंसिपल, शिक्षक और मैनेजर एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए डीआईओएस के हाथ की कठपुतली बने हुए हैं। नाका स्थित इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज का मामला गजब का है। कानपुर के गुलुआपुर से ऑफलाइन ट्रांसफर होकर आए श्रीकृष्ण त्रिवेदी के मामले में मैनेजर और तत्कालीन डीआईओएस लखनऊ राकेश कुमार पाड़े ने जबरदस्त झोल किया। शासन को भेजे पत्र में प्रिंसिपल विवेकानंद मिश्रा ने आरोप लगाया कि कानपुर के गुलवापुर से ट्रांसफर होकर आए श्रीकृष्ण त्रिवेदी को अधियाचित पद पर स्थानांतरण किया गया है, जो नियम विरुद्ध है, यही नहीं इसका कार्यभार ग्रहण कराने में भी जबरदस्त मनमानी की गई है। सभी को खूब पता है कि ऑफलाइन ट्रांसफर में कितने लाख रुपए कहां-कहां खर्च होते हैं। ऐसे में कुछ छीटें तो जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में भी पड़े हैं उसी का कर्ज उतारने के लिए वह श्रीकृष्ण त्रिवेदी का वेतन भुगतान करने के लिए परेशान थे। सूत्र बताते हैं कि श्रीकृष्ण त्रिवेदी के वेतन बिल पर साइन करने के लिए प्रिंसिपल विवेकानंद मिश्रा ने जब राकेश कुमार पांड़े से मार्गदर्शन मांगा तो वे भड़क गए और कॉलेज के वरिष्ठ प्रवक्ता का हस्ताक्षर ही प्रमाणित कर दिया। कहानी यहीं पर खत्म नहीं हुई अवैध ढंग से उन्होंने अधियाचित पद पर ट्रांसफर लेकर आए श्रीकृष्ण त्रिवेदी का लाखों रुपए का भुगतान तो कराया ही कराया साथ ही मैनेजर के साथ गठजोड़ करके 6 साल से कालातीत संस्था को बैक डेट से पुराने मैनेजर को ही फिर से बागडोर थमा दी और मार्गदर्शन मांगने वाले आयोग से चयनित प्रिंसिपल विवेकानंद मिश्रा का वेतन मैनेजर से मिलीभगत करके रुकवा कर यहां से भाग निकला। बताते हैं कि जब मई माह का वेतन इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज के सभी शिक्षकों का तो आया है लेकिन प्रिंसिपल का नहीं आया तो उन्होंने खोजबीन शुरू की और लेखाधिकारी से इस बारे में जानकारी मांगी कि जब प्रिंसिपल के साइन नहीं हुए तो कैसे सभी के वेतन निकल गए और उनका वेतन क्यों रुका। इस पर पता चला कि उनके जूनियर शिक्षक के हस्ताक्षर से सारा वेतन भुगतान किया गया है। अब इस बात की शिकायत नए जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार पांडे से प्रिंसिपल ने की है। माना जा रहा है कि इसमें दोषियों के खिलाफ तो कार्रवाई होगी लेकिन असल दोषी देवीपाटन मंडल के प्रभारी ज्वाइन्ट डायरेक्टर और डीडीआर राकेश कुमार के ऊपर कौन कार्रवाई करेगा और उनकी वजह से परेशान शिक्षकों और प्रिंसिपल के समय की भरपाई कौन करेगा? यह कोई नहीं बता पा रहा है।




चपरासी को बिना किसी ऑर्डर के जबरन कर रखा था अटैच 

लखनऊ। एक तरफ शासन के प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी स्पष्ट रूप से कहते हैं कि किसी भी कर्मचारी को कार्यालय में अटैच ना किया जाए लेकिन इसके बावजूद भी डीआईओएस राकेश कुमार ने इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज के चपरासी शोभित पाल को अपने कार्यालय में अटैच कर लिया और तो और इस अटैचमेंट का कोई आर्डर भी नहीं जारी किया लेकिन उसकी उपस्थिति कॉलेज में ही दिखाकर उसका वेतन वहां से निकाला जा रहा था। इस मामले में भी जैसे ही प्रिंसिपल विवेकानंद मिश्रा ने भ्रष्ट राकेश कुमार पांड़े से दरियाफ्त किया तो राकेश ने मनीषा द्विवेदी से चपरासी की उपस्थिति का एक लेटर बनवा कर भेज दिया। प्रिंसिपल विवेकानंद मिश्रा ने डीआईओएस को भेजे पत्र में लिखा है कि शोभित पाल को बोर्ड परीक्षा के केंद्र निर्धारण में सहयोग के लिए लगाया गया था लेकिन इसके बावजूद मार्च एवं अप्रैल में भी शोभित पाल अनुपस्थित चल रहे हैं। चपरासी को अपने घर के काम में लगा करके राकेश कुमार अफसरशाही का रूआब गाँठ रहा था। प्रिंसिपल द्वारा यह पूछना उनको इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने बृजेश बर्नवाल के साइन अटैच करके शोभित पाल के पुराने वेतन भी जारी करा दिए और तो और उन्होंने मनीषा द्विवेदी के हस्ताक्षर से कॉलेज को उपस्थिति के लिए एक पत्र भेज दिया।

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