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श्रावण मास में पार्थिव पूजन का है विशेष महत्व : विनय राघव दास
- दैनिक लोक भारती
- 04 Aug, 2026
मोहम्मद नईम
राजापाकड़ कुशीनगर। क्षेत्र के महान कथा वाचक एवं मानस मर्मज्ञ बरवा राजापाकड़ सपही निवासी पंडित विनय राघव दास जी महाराज ने पवित्र श्रावण मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुये कहा कि श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी महीना माना गया है। इस मास में भगवान शिव के पार्थिव लिंग का निर्माण कर विधिपूर्वक पूजन करने का विशेष महत्व बताया गया है।
मिट्टी से निर्मित पार्थिव शिवलिंग हमें यह संदेश देता है कि यह संसार नश्वर है, जबकि भगवान शिव शाश्वत हैं। श्रावण में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण, अभिषेक और पूजन करने से मन को शांति तथा आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार जल, दुग्ध, दधि, मधु, घृत तथा गंगाजल आदि से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। पार्थिव पूजन केवल बाहरी कर्मकाण्ड नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि का साधन भी है। शिवलिंग के निर्माण से लेकर विसर्जन तक भक्त में त्याग, समर्पण और विनम्रता का भाव जागृत होता है।
श्रावण मास में पार्थिव पूजन के साथ महामृत्युंजय मंत्र, शिव पंचाक्षर मंत्र अथवा “ॐ नमः शिवाय” का जप करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
भगवान शिव की कृपा से जीवन में शांति, सद्बुद्धि और सकारात्मकता का संचार हो-इसी भावना के साथ श्रावण में पार्थिव पूजन करना चाहिए। श्रद्धा, संयम और सात्त्विक भाव से किया गया शिव पूजन भक्त के जीवन को शिवमय बनाने का सुंदर माध्यम है।
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