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कानपुर मेट्रो कॉरिडोर-2 की डाउनलाइन टनल में ट्रैक निर्माण पूरा, विजय नगर तक पटरी तैयार

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रावतपुर-डबल पुलिया अंडरग्राउंड सेक्शन में तेजी से आगे बढ़ रहा काम, अपलाइन पर भी ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया जारी

मेट्रो में इस्तेमाल हो रहा बैलास्ट-लेस ट्रैक, कम रखरखाव के साथ यात्रियों को मिलेगी सुरक्षित और आरामदायक सेवा

अरविन्द पाण्डेय

कानपुरकानपुर मेट्रो परियोजना के कॉरिडोर-2 में निर्माण कार्य ने एक और अहम पड़ाव हासिल किया है। सीएसए से बर्रा-8 तक प्रस्तावित करीब 8.60 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर-2 के अंडरग्राउंड हिस्से की डाउनलाइन टनल में ट्रैक निर्माण का काम पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही कॉरिडोर-2 डिपो रैंप से विजय नगर स्टेशन के पास बने रैंप तक डाउनलाइन ट्रैक तैयार हो गया है।

कॉरिडोर-2 का करीब 4.10 किलोमीटर हिस्सा रावतपुर से डबल पुलिया के बीच भूमिगत है। इसी अंडरग्राउंड सेक्शन की डाउनलाइन टनल में ट्रैक निर्माण पूरा किया गया है। वहीं अपलाइन टनल में ट्रैक बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। इसके अलावा करीब 4.50 किलोमीटर के एलिवेटेड सेक्शन को दो हिस्सों में तैयार किया जा रहा है, जहां अपलाइन और डाउनलाइन दोनों पर ट्रैक निर्माण की प्रक्रिया जारी है।

टनलिंग के बाद शुरू हुआ था ट्रैक निर्माण

कॉरिडोर-2 के अंडरग्राउंड सेक्शन में टनलिंग का काम इसी साल मार्च में पूरा होने के बाद ट्रैक निर्माण शुरू किया गया था। सबसे पहले रेल की वेल्डिंग कर उन्हें डाउनलाइन टनल में बिछाने का काम शुरू हुआ। इसके लिए कॉरिडोर-2 डिपो रैंप के पास फ्लैश बट वेल्डिंग (एफबीडब्ल्यू) प्लांट को भूमिगत हिस्से में स्थापित किया गया।

प्लांट में रेल को वेल्ड करने के बाद ट्रैक्टर और अन्य उपकरणों की मदद से पटरियों को टनल के भीतर पहुंचाकर निर्धारित स्थान पर बिछाया गया। इसके बाद ट्रैक स्लैब की ढलाई की गई। ट्रैक में डिरेलमेंट गार्ड और थर्ड रेल लगाने की व्यवस्था भी की गई है।

बैलास्ट-लेस ट्रैक से कम होगा रखरखाव

कानपुर मेट्रो के अंडरग्राउंड और एलिवेटेड दोनों सेक्शन में बैलास्ट-लेस यानी गिट्टी रहित ट्रैक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तरह के ट्रैक में पारंपरिक गिट्टी वाले ट्रैक की तुलना में रखरखाव की जरूरत कम होती है और इसकी आयु भी लंबी होती है।

मेट्रो सेवाओं के दौरान ट्रेनों का संचालन लंबे समय तक होता है। ऐसे में ट्रैक के नियमित रखरखाव के लिए सीमित समय उपलब्ध रहता है। बैलास्ट-लेस ट्रैक इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है, जिससे कम रखरखाव के बावजूद ट्रेनों का संचालन सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने में मदद मिलती है।

कॉरिडोर-2 में डाउनलाइन ट्रैक का निर्माण पूरा होना परियोजना की प्रगति में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब अपलाइन और एलिवेटेड सेक्शन में चल रहे ट्रैक निर्माण कार्य को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। 

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