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लोकगीत व परंपराएं समाज की सांस्कृतिक पहचान नहीं, बल्कि उसकी पीढ़ियों की स्मृति और जीवन दर्शन होती है-अतुल सिंह

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लोकगीत हमारी मिट्टी, हमारी भाषा और हमारी सामाजिक परंपराओं का जीवंत दस्तावेज हैं-राम प्रसाद प्रधानाचार्य

लोकगीतों की मधुर तान से गूंजा गंभीरपुर, कजरी उत्सव में दिखी भोजपुरी लोक संस्कृति की समृद्ध छटा

कप्तानगंज, कुशीनगर। भोजपुरी लोकगीत, लोकनृत्य और लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित संस्था लोकमंजरी की ओर से गंभीरपुर मंदिर परिसर में कजरी उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री अतुल सिंह ने किया।

विशिष्ट अतिथि अंतरराष्ट्रीय लोक गायक डॉ. राकेश श्रीवास्तव, जेपी इंटरमीडिएट कॉलेज के प्रधानाचार्य राम प्रसाद, लोकमंजरी के अध्यक्ष विश्व मित्र भट्ट तथा गंभीरपुर के ग्राम प्रधान अंबिका गुप्ता रहे। संचालन विश्व भोजपुरी सम्मेलन कुशीनगर एवं विमर्श साहित्यिक सामाजिक सेवा संस्था के अध्यक्ष आरके भट्ट ने किया।

दीप प्रज्ज्वलन, शिव स्तुति, मंगलाचरण और नृत्य के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। शांभवी, अंजलि, अनुष्का और अमृता ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद परी, ज्योति, नंदिनी, रोशनी और अंशिका ने पारंपरिक कजरी गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को लोक रंग से भर दिया।


जेपी इंटरमीडिएट कॉलेज की छात्राओं ने भी कजरी गीत प्रस्तुत किए। तथा तेज सिंह, काजल, देवानंद, अनामिका गुप्ता, आयुषी, मानसी सिंह, आकाश पांडेय, सुभाष, सुहाना, ज्योति, जितेंद्र शर्मा, मंटू पाठक और साक्षी गुप्ता ने एक से बढ़कर एक पारंपरिक कजरी गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। डॉ. राकेश शर्मा, प्रभाकर शुक्ला और लोकमंजरी के उपाध्यक्ष रामदरश शर्मा ने भी शानदार पारंपरिक कजरी गीत प्रस्तुत किए।

दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री अतुल सिंह ने कहा कि लोकगीत और लोक परंपराएं किसी समाज की केवल सांस्कृतिक पहचान नहीं, बल्कि उसकी पीढ़ियों की स्मृति और जीवन दर्शन होती हैं। कजरी जैसे पारंपरिक गीतों को मंच देना अपनी जड़ों को मजबूत करने जैसा है।

उन्होंने कहा कि आज जब आधुनिकता के प्रभाव में हमारी अनेक लोक परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होने के कगार पर हैं, ऐसे आयोजनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। लोक संस्कृति को केवल मंच तक सीमित रखने के बजाय इसे नई पीढ़ी की शिक्षा और संस्कारों से जोड़ना होगा, तभी भोजपुरी की समृद्ध विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सकेगी।

जेपी इंटरमीडिएट कॉलेज के प्रधानाचार्य राम प्रसाद ने कहा कि लोकगीत हमारी मिट्टी, हमारी भाषा और हमारी सामाजिक परंपराओं का जीवंत दस्तावेज हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अपनी लोक संस्कृति से जोड़ना भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विद्यालय की छात्राओं द्वारा कजरी की प्रस्तुति इस बात का प्रमाण है कि उचित अवसर और मार्गदर्शन मिले तो नई पीढ़ी अपनी लोक विरासत को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ा सकती है।

संस्था के अध्यक्ष विश्व मित्र भट्ट ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि लोकमंजरी का उद्देश्य भोजपुरी लोकगीत, लोकनृत्य और लोक परंपराओं को संरक्षित करते हुए उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि संस्था आने वाले समय में लोक संस्कृति से जुड़े कलाकारों को प्रशिक्षण और मंच उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास करती रहेगी।

कोषाध्यक्ष डॉ. चंदन गोंड ने कहा कि कजरी केवल गीत नहीं, बल्कि भोजपुरी समाज के सुख-दुख, प्रेम, विरह और उत्सव की संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है। लोक कलाकारों को मंच और सम्मान देना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकमंजरी ऐसे आयोजनों के माध्यम से गांवों में बिखरी लोक प्रतिभाओं को सामने लाने और उन्हें नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास कर रही है।

इस दौरान डॉ. राकेश श्रीवास्तव एवं अनिरुद्ध प्रसाद का विशेष सम्मान किया गया। गंभीरपुर के पारंपरिक होली गीतों को प्रस्तुत करने वाले लोक कलाकारों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संगत कलाकार प्रेम नारायण पांडेय, अशोक वाल्मीकि, संत राज, यशवंत और अमित कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी कलाकारों को कार्यशाला आयोजित कर अंतरराष्ट्रीय लोक गायक रामदास शर्मा द्वारा प्रशिक्षण दिया गया था। इस अवसर पर मोहन पांडेय, फरेन्द्र पांडेय, आफताब आलम, दिनेश शर्मा, अमरजीत मिश्रा एडवोकेट, जयराज सिंह, इरशाद सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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