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कुडरा के बीहड़ों में विराजमान हैं 300 वर्ष पुराने श्री राधा-कृष्ण

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यमुना किनारे स्थित प्राचीन मंदिर आस्था का केंद्र, पक्की सड़क न होने से श्रद्धालुओं को होती है परेशानी

रोहित अवस्थी

औरैया। जनपद का स्वरूप भले ही छोटा हो, लेकिन धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से इसकी पहचान काफी व्यापक है। कुडरा क्षेत्र में बीहड़ों की वादियों के बीच यमुना नदी के निकट स्थित प्राचीन श्री राधा-कृष्ण मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। स्थानीय मान्यता है कि मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वर्षभर दूर-दराज से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर के महाराज के छोटे शिष्य सुदर्शन जी महाराज ने बताया कि भरेह स्टेट के सेंगर राजाओं द्वारा घने जंगल के बीच करीब तीन सौ वर्ष पहले इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। यमुना नदी के किनारे स्थित मंदिर का निर्माण चूना और पुरानी ईंटों से किया गया है। बारिश के दिनों में आसपास की बबूल की झाड़ियां और प्राकृतिक वातावरण मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं।


मंदिर के 80 वर्षीय महंत श्री रामप्रिय दास जी महाराज ने बताया कि उनसे पहले भी तीन महंत मंदिर की सेवा कर चुके हैं। उनके पूर्व स्वामी हरिनाम दास जी महाराज मंदिर के महंत रहे। मंदिर में प्रतिदिन सुबह आठ बजे आरती होती है। इसके बाद दोपहर 12 बजे तक कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते हैं। शाम को आठ बजे आरती का आयोजन किया जाता है।

मंदिर के भक्त दीपक शुक्ला ने बताया कि गोहनी खुर्द से मंदिर तक करीब दो किलोमीटर पक्की सड़क नहीं है। इससे बरसात के मौसम में श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में काफी दिक्कत होती है। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने सड़क निर्माण की मांग की है।

राष्ट्रीय लोकदल के जिलाध्यक्ष व अधिवक्ता सागर शुक्ला ने कहा कि जिला प्रशासन को इस प्राचीन धार्मिक स्थल के विकास और मंदिर तक पहुंचने के लिए बेहतर मार्ग उपलब्ध कराने की दिशा में पहल करनी चाहिए। इससे मंदिर की धार्मिक पहचान के साथ क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।

 

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