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श्रावस्ती की जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग (IAS) के नेतृत्व में जिले में हो रहे बदलावों
- दैनिक लोक भारती
- 08 Sep, 2026
हेमन्त कुमार श्रीवास्तव/ओम मिश्रा
आईएएस अन्नपूर्णा गर्ग की प्रोफाइल और कार्यशैली
श्रावस्ती।जिले के विकास और जनकल्याण के लिए अच्छे एवं प्रभावी कार्य करने के लिए उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, सड़क, पेयजल और कानून-व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उक्त विचार जिलाधिकारी अन्नपुर्णा गर्ग ने कही।उन्होंने कहा कि गरीबों और जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिले, यह सुनिश्चित करना चाहिए। साथ ही, जनता की समस्याओं को सुनकर उनका शीघ्र समाधान करना और जिले में पारदर्शी एवं निष्पक्ष प्रशासन स्थापित करना जिलाधिकारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
श्रावस्ती सुशासन की एक नई मिसाल पेश कर रहा
श्रावस्ती उत्तर प्रदेश का आकांक्षी जनपद श्रावस्ती इन दिनों सुशासन की एक नई मिसाल पेश कर रहा है। इस बदलाव के केंद्र में हैं जिले की जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग (IAS)। वर्ष 2016 बैच की तेजतर्रार आईएएस अधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग मूल रूप से हरियाणा (फरीदाबाद) की रहने वाली हैं और उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान (Psychology) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपनी इसी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के कारण वे जनता की मनोवैज्ञानिक नब्ज और उनकी समस्याओं की गहराई को बेहद संवेदनशीलता से समझती हैं। उन्होंने जिले की बागडोर संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया कि प्रशासनिक मशीनरी का एकमात्र उद्देश्य अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा करना है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और शिक्षा पर विशेष फोकस
जिलाधिकारी ने श्रावस्ती जैसे सीमावर्ती जिले में स्वास्थ्य और शिक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है। स्वास्थ्य सेवाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए वह लगातार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक उपकेंद्रों का औचक निरीक्षण करती हैं। वहां वे दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों की उपस्थिति और गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण की स्थिति को स्वयं जांचती हैं। इसके साथ ही, जिले के नौनिहालों का भविष्य संवारने के लिए वे बेसिक शिक्षा और आंगनवाड़ी केंद्रों पर विशेष ध्यान दे रही हैं। निरीक्षण के दौरान वे खुद बच्चों के बीच बैठकर उनकी पढ़ाई का स्तर और मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता परखती हैं। बच्चों से पढ़ाई से संबंधित प्रश्न पूछकर उनकी जानकारी एवं सीखने के स्तर का आकलन किया। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ-साथ उनकी विषयगत समझ को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया।
बाढ़ आपदा प्रबंधन में मुस्तैदी और स्थलीय निरीक्षण
श्रावस्ती जिला प्रत्येक वर्ष राप्ती नदी के उफान के कारण बाढ़ की विभीषिका झेलता है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग केवल दफ्तर में बैठकर योजनाएं नहीं बनातीं, बल्कि मानसून के दौरान स्वयं संवेदनशील और प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण करती हैं। हाल ही में उन्होंने विभिन्न तटबंधों और सेतु मार्गों (जैसे सिसवारा घाट पुल की एप्रोच रोड) का जायजा लिया। उन्होंने बाढ़ कार्य खंड और सेतु निगम के अभियंताओं को आपसी समन्वय के साथ ड्रेजिंग कराने और किनारों को समय से सुरक्षित करने के कड़े निर्देश दिए हैं, ताकि ग्रामीणों को जान-माल की कोई हानि न हो।
जनसुनवाई की अनूठी व्यवस्था और 'क्रॉस-वेरिफिकेशन'
"कोई भी फरियादी निराश होकर न लौटे"—यह जिलाधिकारी के कार्य करने का मूलमंत्र है। कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान वे हर पीड़ित की बात बेहद धैर्य से सुनती हैं। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे शिकायतों पर केवल निर्देश देकर शांत नहीं बैठतीं। उन्होंने एक सख्त फीडबैक और क्रॉस-वेरिफिकेशन सिस्टम तैयार किया है। इसके तहत जिलाधिकारी कार्यालय से शिकायतकर्ताओं को सीधे फोन कर पूछा जाता है कि क्या उनकी समस्या का पूरी तरह निस्तारण हुआ है और क्या वे कार्रवाई से संतुष्ट हैं। इस व्यवस्था से जिले के अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ी है और जनता का प्रशासन पर भरोसा अटूट हुआ है।
स्वच्छता अभियान पर कड़ी निगरानी
स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिलाधिकारी द्वारा विशेष निगरानी की जा रही है। स्वच्छता अभियान के दौरान उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को साफ-सफाई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि स्वच्छता अभियान केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका प्रभाव गांवों और नगर क्षेत्रों में धरातल पर दिखाई देना चाहिए।उन्होंने साफ-सफाई, कूड़ा निस्तारण तथा जन-जागरूकता पर विशेष
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