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रामगंगा ने अपनाया रौद्र रूप, ग्रामीणों की बढ़ीं धड़कनें

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घरों में भरा बाढ़ का पानी, भोजन तक की दिक्कत | संक्रमण का सता रहा डर

प्रदीप रघुवंशी

मिर्जापुर। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हो रही बारिश से गंगा और रामगंगा नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। रामगंगा के बढ़ते पानी ने तटवर्ती गांवों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। कई गांवों की आबादी और संपर्क मार्गों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है, जबकि हजारों बीघा फसलें जलमग्न हैं।

गंगा का पानी शमसाबाद-जलालाबाद स्टेट हाईवे पर चौरा गांव के पास तेज बहाव के साथ उतर रहा है। चौरा-नगला बसोला संपर्क मार्ग भी पानी में डूब गया है। कई सड़कें बाढ़ के पानी से कटकर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित है। दर्जनों गांवों को ब्लॉक मुख्यालय से जोड़ने वाले रास्ते भी पानी से लबालब हैं।

रामगंगा का पानी कस्बे के दलित मोहल्ले समेत स्टेट हाईवे किनारे स्थित नई बस्ती की आबादी में घुस गया है। ग्रामीणों के घरों में पानी भरने से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो गई है। रामलाल ने बताया कि उनके घर में करीब दो फीट पानी भरा है। खाने-पीने का सामान भीग जाने से भोजन बनाने में परेशानी हो रही है। दूसरे गांव में रह रहे परिवार के लोग सुबह-शाम खाना भेज रहे हैं।

पैलानी उत्तर गांव के ग्रामीणों का कहना है कि वहां एक माह से अधिक समय से गंगा का पानी भरा हुआ है। लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल बाढ़ का सामना करने के बावजूद स्थायी और ठोस समाधान नहीं किया जा रहा है।

बाढ़ नियंत्रण कक्ष की ओर से 11 सितंबर की सुबह आठ बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार भैंसार दाई घाट तटबंध पर गंगा का जलस्तर 143.50 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 143.65 मीटर से 0.15 मीटर नीचे है। वहीं डबरी घाट पर रामगंगा का जलस्तर 137.74 मीटर रहा, जो पिछले माप से 0.44 मीटर अधिक है।

 

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