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नाशिक में रामकथा के छठे दिन भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के वन गमन प्रसंग का जीवंत वर्णन

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आचार्य शांतनु जी महाराज ने सुनाया वन गमन से केवट प्रसंग तक का भावपूर्ण प्रसंग, 1200 से 1300 श्रद्धालुओं ने लिया कथा का लाभ

हिंदी के मेधावी विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्राचार्यों का सम्मान, भजन-आरती और महाप्रसाद के साथ हुआ आयोजन का समापन

लोक भारती ब्यूरो

नाशिक। हिंदी प्रसारिणी सभा नाशिक की ओर से आयोजित भव्य रामकथा के छठे दिन भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के वन गमन प्रसंग का आचार्य श्री शांतनु जी महाराज ने भावपूर्ण और जीवंत वर्णन किया। कथा के दौरान भगवान राम के वन जाने से लेकर राजा दशरथ की पीड़ा, ग्रामीणों द्वारा गंगा तट तक साथ देने और भगवान राम के केवट से संवाद तक के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

रामकथा का आयोजन नाशिक में गंगापुर रोड स्थित सोमेश्वर मंदिर के पास पाटिल लांस में किया जा रहा है। छठे दिन कथा शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक चली। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। आयोजकों के अनुसार, करीब 1200 से 1300 लोगों ने कथा का लाभ लिया और महाप्रसाद ग्रहण किया।

कथा के दौरान आचार्य शांतनु जी महाराज ने भगवान राम की भक्ति और उनकी कृपा का महत्व बताते हुए कहा—

“जा पर कृपा राम की होई।
ता पर कृपा करहिं सब कोई॥”


राम वन गमन से केवट प्रसंग तक भावुक हुए श्रद्धालु

छठे दिन की कथा की शुरुआत व्यासपीठ पर विराजित भगवान राम दरबार के पूजन और आरती के साथ हुई। पूजन और आरती में हिंदी प्रसारिणी सभा की कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ संरक्षक श्री केसी पांडेय, अध्यक्ष श्री कृपाशंकर सिंह, जनरल सेक्रेटरी संजीव चतुर्वेदी, प्रवक्ता श्री वेद प्रकाश पाठक, सलाहकार अजय सिंह और श्री गोविंद सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने भाग लिया।

इस अवसर पर Himi इंटरनेशनल से जुड़े श्री गोविंद सिंह, श्री भुवाल सिंह, जो महाराष्ट्र भाजपा के उपाध्यक्ष हैं, श्री बब्बू सिंह और श्री नेता यादव भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कथा में भगवान राम के वन जाने के प्रसंग का वर्णन करते हुए आचार्य शांतनु जी महाराज ने बताया कि भगवान राम के वन जाने की बात से उनके पिता राजा दशरथ गहरे दुख में डूब गए। पुत्र वियोग की पीड़ा में उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई। इसके बाद भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ वन की ओर प्रस्थान करते हैं।

कथा को आगे बढ़ाते हुए गंगा तट का प्रसंग सुनाया गया, जहां ग्रामवासी भी भगवान राम के साथ गंगा तट तक पहुंचे। इसके बाद केवट प्रसंग ने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से भावुक किया। कथा के अनुसार, केवट ने भगवान राम के चरण पखारने की इच्छा जताई और चरण धोने के बाद ही उन्हें नाव में बैठाने की जिद की। भगवान राम के गंगा पार जाने के बाद उतराई के रूप में केवट को मुद्रिका दिए जाने का प्रसंग भी आचार्य जी ने विस्तार से सुनाया।

आचार्य शांतनु जी महाराज के भावपूर्ण वर्णन के दौरान कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए। भगवान राम के वन गमन और केवट की भक्ति से जुड़े प्रसंगों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

हिंदी के मेधावी विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्राचार्यों का सम्मान

रामकथा के छठे दिन हिंदी प्रसारिणी सभा नाशिक की ओर से हिंदी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। आगामी हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी के 12 मेधावी विद्यार्थियों, 6 शिक्षकों और 5 प्राचार्यों को आचार्य श्री शांतनु जी महाराज के हाथों सम्मानित किया गया।

आयोजकों ने बताया कि हिंदी के प्रति विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों के योगदान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया। सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और उसके प्रति नई पीढ़ी में रुचि बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

रामकथा का छठा दिन भक्ति गीतों और आरती के साथ संपन्न हुआ। “राम सिया राम, जय जय राम” के भजनों से कथा स्थल गूंज उठा। इसके बाद आरती हुई और श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया।

कथा में लगातार बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से आयोजकों में भी उत्साह दिखाई दिया। हिंदी प्रसारिणी सभा नाशिक की ओर से श्रद्धालुओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

आयोजकों के अनुसार, रामकथा का अगला और समापन दिवस दोपहर 11 बजे से 2 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही भव्य रामकथा का समापन होगा।

बोलो सिया रामचंद्र की जय।

 

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