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87 सुरक्षा गार्ड्स के समायोजन की मांग को लेकर लखनऊ विश्वविद्यालय में धरना, एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस ने उठाई जांच की मांग

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हिन्द सिक्योरिटी फोर्स पर कर्मचारियों से वसूली और उत्पीड़न के आरोप, कुलपति से हस्तक्षेप की मांग

धरना न करने संबंधी पत्र का नहीं दिखा असर, सरस्वती प्रतिमा स्थल पर जुटे सुरक्षाकर्मी और छात्र नेता

गिरीश तिवारी 

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में कार्यरत 87 सुरक्षा गार्ड्स के समायोजन और उनके साथ कथित रूप से हुए उत्पीड़न के खिलाफ सोमवार को एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस के पदाधिकारियों और छात्र नेताओं ने धरना शुरू कर दिया। विश्वविद्यालय परिसर में सरस्वती प्रतिमा के पास आर्यन मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित धरने में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों ने भी अपनी समस्याएं रखीं।

धरना दे रहे लोगों ने हिन्द सिक्योरिटी फोर्स के मालिक रामनिवास चौधरी पर भ्रष्टाचार, कर्मचारियों से कथित वसूली और उत्पीड़न के आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों ने लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जयप्रकाश सैनी से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर जांच कराने और प्रभावित कर्मचारियों को राहत दिलाने की मांग की।

87 कर्मचारियों के समायोजन की उठाई मांग

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुरक्षा गार्ड्स के रूप में कार्य कर रहे कई कर्मचारी लंबे समय से कंपनी और रोजगार से जुड़े मामलों को लेकर परेशान हैं। धरने के माध्यम से मांग की गई कि जिन 87 कर्मियों का रोजगार प्रभावित हुआ है, उन्हें लखनऊ विश्वविद्यालय अथवा लखनऊ में हिन्द सिक्योरिटी फोर्स की अन्य संचालित साइटों पर उनकी योग्यता के अनुसार फोर्थ क्लास या अन्य उपयुक्त पदों पर समायोजित किया जाए।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सुरक्षा गार्ड्स की भर्ती के दौरान कुछ अक्षम कर्मियों से पैसे लिए गए थे। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर कथित रूप से वसूली गई रकम वापस दिलाने की मांग भी कुलपति के समक्ष रखी।


कंपनी पर वसूली और उत्पीड़न के आरोप

धरने में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि हिन्द सिक्योरिटी फोर्स से जुड़े सैकड़ों सुरक्षाकर्मी कंपनी की कार्यप्रणाली से परेशान हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, कंपनी के मालिक रामनिवास चौधरी के खिलाफ कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार और कथित लूट-खसोट की शिकायतें उठाई हैं।

धरना दे रहे लोगों ने विश्वविद्यालय से जुड़े क्लर्क बाबू नीरज शर्मा और बालकिशन के खिलाफ भी सुरक्षाकर्मियों के उत्पीड़न की शिकायतों की जांच कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस संबंध में कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष कार्रवाई की जानी चाहिए।

धरना रोकने के पत्र का नहीं दिखा असर

धरने को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की ओर से पहले से की गई कार्रवाई का भी प्रदर्शन पर कोई खास असर नहीं दिखाई दिया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, रविवार रात लखनऊ विश्वविद्यालय चौकी से सुरक्षा गार्ड्स के नाम एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें धरना-प्रदर्शन में शामिल न होने को लेकर निर्देश दिए गए थे।

हालांकि सोमवार को सरस्वती प्रतिमा स्थल पर एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस के पदाधिकारी, छात्र नेता और बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी पहुंच गए और अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं के समाधान और रोजगार सुरक्षा की मांग को प्रमुखता से उठाया।

कुलपति से हस्तक्षेप कर समाधान की मांग

धरने का नेतृत्व कर रहे आर्यन मिश्रा और अन्य प्रदर्शनकारियों ने कुलपति प्रो. जयप्रकाश सैनी से मांग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन मामले में हस्तक्षेप करे। उन्होंने कथित वसूली और उत्पीड़न के आरोपों की जांच कराने के साथ प्रभावित 87 कर्मियों के रोजगार और समायोजन के संबंध में ठोस निर्णय लेने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य कर्मचारियों को न्याय दिलाना और उनकी आजीविका से जुड़े संकट का समाधान कराना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया जा सकता है।

 

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