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30 लाख का अमृत सरोवर बदहाल, धंसी सड़कें और उगी झाड़ियां

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एक एकड़ में बने तालाब की हालत देखकर उठे सवाल—आखिर कहां हो रहा मनरेगा का काम?

आशीष द्विवेदी

बिल्हौर। सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना पर मदारा राय गुमान ग्राम पंचायत में सवालिया निशान लग गया है। करीब 30 लाख रुपये की लागत से एक एकड़ में तैयार किया गया अमृत सरोवर देखरेख के अभाव में बदहाली का शिकार है। स

रोवर तक पहुंचने वाली सड़क कई जगह धंस गई है, जबकि चारों तरफ झाड़ियों का कब्जा है। परिसर में जगह-जगह गड्ढे दिखाई दे रहे हैं।तस्वीरें विकास के दावों से इतर सरकारी धन के इस्तेमाल और मनरेगा कार्यों की हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं।


ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरोवर के रखरखाव और परिसर के विकास पर लगातार काम हो रहा है तो मौके पर उसका असर क्यों नहीं दिखाई दे रहा? आखिर मनरेगा का काम कहां हो रहा है और कागजों में कितना काम दर्ज है?अमृत सरोवर का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र का सुंदरीकरण और रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन यहां हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। सरोवर के चारों ओर उगी झाड़ियां और धंसी सड़कें व्यवस्था की अनदेखी की कहानी बयां कर रही हैं।

ग्रामीणों ने अमृत सरोवर पर खर्च हुई करीब 30 लाख रुपये की धनराशि, मनरेगा से कराए गए कार्यों और भुगतान की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच से ही साफ होगा कि सरकारी धन का कितना हिस्सा धरातल पर खर्च हुआ और कितना सिर्फ कागजों में विकास बनकर रह गया।

अब सवाल यह है कि जिस अमृत सरोवर पर लाखों रुपये खर्च किए गए, वह कुछ ही समय में बदहाली का शिकार कैसे हो गया? प्रशासन जांच कराकर जिम्मेदारी तय करता है या फिर झाड़ियों में दबे सवाल यूं ही अनदेखे रह जाएंगे।  बिल्हौर खण्ड विकास अधिकारी नेम चन्द्र ने जल्द साफ सफाई व बदहाली का निरीक्षण कर सुधार के संकेत दिए हैं।

 

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