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अंग्रेजी शराब में पानी मिलाकर बेचने का काफी दिनों से चल रहा था खेल उच्चाधिकारियों की जांच में हुआ खुलासा

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इंदरपुर व जोकवा में शराब का पानी कांड को लेकर आबकारी महकमे की निगरानी पर उठे सवाल शराब की बोतल में ‘पानी का खेल, छापेमारी ने खोल दी  आबकारी विभाग के निगरानी की पोल

मोहम्मद नईम

कुशीनगर। बीते दिनों आबकारी विभाग के आला अफसरो की छापेमारी ने शराब की बोतल ही नहीं, बल्कि जिले के विभागीय निगरानी व्यवस्था का ढक्कन भी खोल दिया!कप्तानगंज के इंदरपुर चौराहा और जोकवा की अंग्रेजी शराब की दुकानों पर उच्चाधिकारियों की कार्रवाई के बाद शराब में पानी मिलाकर बिक्री किए जाने की घटना ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। सवाल यह है कि अगर दुकानों पर मिलावट का खेल चल रहा था तो नियमित जांच करने वाले जिम्मेदारों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या जिले की आबकारी निगरानी सिर्फ कागजों पर चल रही है, या फिर इस कथित खेल के पीछे कोई ऐसा हाथ है जिसकी पहुंच विभाग की चौखट और मुखिया तक है?

बेशक! सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन दुकानों पर गोंडा के ज्वाइंट कमीश्नर को पहुंचकर छापेमारी करनी पड़ी, वहां स्थानीय स्तर पर किस तरह की निगरानी की जा रही थी? क्या नियमित निरीक्षण में यह खेल दिखाई नहीं दिया या फिर निरीक्षण की प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में है? यह वह बिंदु है जहां से ‘विभाग-ए-शहशाह’ के कथित संरक्षण की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। हालांकि इस संरक्षण की पुष्टि जांच का विषय है, लेकिन सवाल यह जरूर है कि यदि किसी दुकान पर मिलावट का खेल चल रहा था तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी या कार्रवाई सिर्फ दुकान तक सीमित रहेगी?


जिला आबकारी अधिकारी की निगरानी पर भी सवाल

कहना ना होगा कि जिले में अंग्रेजी शराब की दुकानों की निगरानी की जिम्मेदारी आबकारी विभाग की है। ऐसे में यदि मिलावट की शिकायत या घटना सामने आती है तो जिला आबकारी अधिकारी की निगरानी व्यवस्था भी सवालों से बच नहीं सकती। आखिर विभाग की नियमित जांच में सब कुछ ‘ठीक-ठाक’ नजर आता रहा और उच्चाधिकारियों की छापेमारी में सवाल क्यों खड़े हो गए?दिलचस्प बात यह है कि विभाग इस पूरे मामले में सिर्फ दुकानों की जांच तक सीमित रहेगी है या फिर मिलावट की जड़ तक पहुंचकर जिम्मेदार अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका की  जांच भी करेगी। बड़ा सवाल यह है कि बोतल में पानी किसने मिलाया और निगरानी तंत्र सोता क्यों रहा? अंग्रेजी शराब में पानी मिलाकर बिक्री का मामला   उपभोक्ताओं के साथ न सिर्फ धोखा देने का है बल्कि आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था की गंभीर विफलता को भी उजागर कर रहा है। देखना यह है कि विभाग इस सवाल का जवाब देता है या फिर बोतल का पानी सूखने के साथ मामला भी फाइलों में सूख जाएगा।

कप्तानगंज इंदरपुर दूकान निरस्त कर दिया गया जबकि जोकवा पर जुर्माना लगाकर नियम संगत तरीके से बहाल किया गया है। समय समय पर छापेमारी की जाती है। नियम विरुद्ध कार्य करने वाले अनुज्ञापियों को किसी भी सूरत मे बख्शा नही जायेगा।

 

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