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काकादेव जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन मनाया गया उत्तम मार्दव धर्म

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अभिषेक-पूजन के साथ हुआ आयोजन, श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ

अहंकार त्यागकर विनम्रता और सरलता का जीवन जीने की दी गई सीख

अरविन्द पाण्डेय 

कानपुर। काकादेव स्थित चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होकर भगवान जिनदेव का पूजन-अभिषेक किया।

प्रातःकालीन कार्यक्रम में अनुराग जैन, राजेश जैन और एसके जैन ने जिनदेव की पूजा-अभिषेक किया। दशलक्षण पर्व के सभी कार्यक्रमों का आयोजन डॉ. पुष्पेंद्र कुमार जैन और वीरेंद्र जैन के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।


इस अवसर पर पंडित श्री कोमल चंद्र जैन ने उत्तम मार्दव धर्म के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मार्दव का अर्थ कोमलता और विनम्रता है। यह धर्म मनुष्य को अहंकार का त्याग कर सरल, विनम्र और कोमल व्यवहार के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि धन, ज्ञान, पद, रूप, प्रतिष्ठा या सफलता का अभिमान व्यक्ति की आत्मिक उन्नति में बाधक बन सकता है। जैन दर्शन में मान कषाय यानी अहंकार को दूर करने पर विशेष जोर दिया गया है। जब व्यक्ति अपनी संपत्ति, ज्ञान, सामर्थ्य या पद के कारण स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ समझने लगता है, तो उसके भीतर अहंकार उत्पन्न होता है। इससे वह दूसरों से दूर होने के साथ आत्मशुद्धि के मार्ग से भी भटक सकता है।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में धर्म अनुयायी और श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

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