आज की ताजा खबर

सुल्तानपुर में DJ की तेज आवाज पर क्यों उठी मुहिम? सोशल मीडिया पोल में 85% लोगों ने किया समर्थन

top-news

‘घर सुल्तानपुर’ की मुहिम में हाई वाइब्रेशन, तेज ध्वनि और तीखी लाइटों पर रोक की मांग

सामाजिक, चिकित्सकीय और अधिवक्ता वर्ग से जुड़े लोगों ने भी अभियान का समर्थन करने की बात कही

सुशील मिश्रा

सुल्तानपुर। धार्मिक महोत्सवों, त्योहारों और वैवाहिक समारोहों में डीजे की बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर सुल्तानपुर में बहस तेज हो गई है। ‘घर सुल्तानपुर फाउंडेशन’ की ओर से हाई वाइब्रेशन, तेज ध्वनि और आंखों पर असर डालने वाली तीखी लाइटों के खिलाफ मुहिम चलाए जाने का दावा किया गया है। संस्था की इस पहल को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

मुहिम से जुड़े लोगों के मुताबिक, धार्मिक आयोजनों में डीजे के बढ़ते चलन के साथ हाई बेस, वाइब्रेशन और तेज रोशनी का इस्तेमाल भी बढ़ा है। उनका कहना है कि खासतौर पर घनी आबादी, अस्पतालों और संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ध्वनि का स्तर नियंत्रित रखा जाना चाहिए, ताकि मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी न हो।

सोशल मीडिया पोल में 85 प्रतिशत समर्थन का दावा

‘घर सुल्तानपुर’ की ओर से बताया गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कराए गए ओपिनियन पोल में 85 प्रतिशत से अधिक नागरिकों ने डीजे में हाई बीट और वाइब्रेशन को बंद करने की मांग का समर्थन किया। संस्था के अनुसार, सोशल मीडिया पर सामने आई प्रतिक्रियाओं के बाद यह मुद्दा जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।

मुहिम से जुड़े लोगों का कहना है कि बीते वर्षों में मुख्य आबादी और चौक के आसपास हुई कुछ दुखद घटनाओं के बाद संबंधित परिवारों ने डीजे के हाई वाइब्रेशन और तेज ध्वनि को लेकर सवाल उठाए थे। हालांकि, इन घटनाओं और डीजे की ध्वनि के बीच चिकित्सकीय या आधिकारिक तौर पर कारण-सम्बंध की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

प्रशासन से जुड़े रुख के तौर पर अभियान में यह बात सामने रखी गई है कि धार्मिक आयोजनों में भक्ति और उत्साह के साथ ध्वनि की तीव्रता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। खासतौर पर घनी आबादी और चिकित्सालयों के आसपास ध्वनि को नियंत्रित रखने की मांग की जा रही है।

देश में Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 के तहत लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम के इस्तेमाल के लिए लिखित अनुमति की व्यवस्था है। सामान्य तौर पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक इनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध है, जबकि राज्य सरकार निर्धारित शर्तों के साथ सीमित धार्मिक या सांस्कृतिक अवसरों पर रात 10 बजे से मध्यरात्रि तक छूट दे सकती है।


अधिवक्ताओं ने भी नियमों के पालन की मांग उठाई

मुहिम से जुड़े सामाजिक संस्थाओं के अधिवक्ताओं ने भी हाई वाइब्रेशन और तेज ध्वनि को नियंत्रित करने की मांग का समर्थन किया है। उनका कहना है कि प्रशासन को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए।

अभियान से जुड़े लोगों ने कहा है कि यदि हाई वाइब्रेशन और तेज ध्वनि पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो गंभीर मरीजों और बच्चों को होने वाली संभावित परेशानी को लेकर न्यायालय का रुख करने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।

कई सामाजिक और राजनीतिक लोगों के जुड़ने का दावा

‘घर सुल्तानपुर’ की ओर से बताया गया है कि ‘नो डीजे वाइब्रेशन’ मुहिम को राजनीतिक, सामाजिक, चिकित्सा और विभिन्न पेशेवर वर्गों से जुड़े लोगों का समर्थन मिल रहा है।

मुहिम से जुड़े नामों में भाजपा जिला अध्यक्ष सुशील त्रिपाठी, संघ से जुड़े पदाधिकारी, चिकित्सक डॉ. एके सिंह, सराफा व्यापार मंडल अध्यक्ष एवं व्यापारी नेता देवी प्रसाद सोनी, डीपी गुप्ता एडवोकेट, कमला नेहरू संस्थान की प्रोफेसर रंजना सिंह, संयुक्त सेवा समिति के संयोजक डॉ. सुधाकर सिंह, डॉ. राधेश्याम सिंह, पूर्व प्राचार्य केएनआई, लेखक एवं यूथ आइकन रितेश रजवाड़ा, सरदार बलदेव सिंह, राहुल सेठ, डॉ. मकसूद सरदार, धर्मेश मिश्रा, स्वामी अजयानंद और पंडित चंद्रकांत मिश्रा समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।

मुहिम से जुड़े लोगों की अपील है कि धार्मिक पर्व और समारोह पूरे उत्साह के साथ मनाए जाएं, लेकिन हाई वाइब्रेशन, अत्यधिक तेज ध्वनि और तीखी लाइटों के इस्तेमाल से बचा जाए। उनका कहना है कि उत्सव की खुशी के साथ बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

 

पेपर व डिजिटल मे विज्ञापन हेतु संपर्क करे

संपर्क सूत्र - +91 77549 54126

 

https://lokbharti.co.in/ad/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *