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सांप के काटने पर झाड़-फूंक नहीं, तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी, जागरूकता से बच सकती है जान
- दैनिक लोक भारती
- 18 Sep, 2026
अंतरराष्ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस पर विशेषज्ञ ने बताया- सांप दिखे तो मारने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाएं
भारत में सर्पदंश से हर साल हजारों मौतें, समय पर इलाज और एंटीवेनम से बच सकती है जान
विवेकानंद पाण्डेय
अयोध्या। सांप का नाम सुनते ही अक्सर लोगों में डर पैदा हो जाता है और सांप दिखाई देने पर उसे मारने की कोशिश की जाती है। हालांकि, सांप पर्यावरण के महत्वपूर्ण हिस्से हैं और चूहों तथा अन्य जीवों की संख्या नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं। अंतरराष्ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस की पूर्व संध्या पर अयोध्या के बर्डमैन आजाद सिंह ने सर्पदंश से बचाव और इसके बाद किए जाने वाले जरूरी उपायों को लेकर लोगों को जागरूक किया।
आजाद सिंह ने बताया कि भारत में सर्पदंश से हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में 2000 से 2019 के बीच सर्पदंश से करीब 12 लाख मौतों का अनुमान लगाया गया, यानी औसतन लगभग 58 हजार मौतें प्रतिवर्ष। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में सर्पदंश के करीब 90 प्रतिशत मामलों के लिए ‘बिग फोर’ यानी कॉमन करैत, इंडियन कोबरा, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर जिम्मेदार माने जाते हैं।
झाड़-फूंक में समय गंवाना पड़ सकता है भारी
आजाद सिंह ने कहा कि सर्पदंश के मामले में जागरूकता की कमी और पारंपरिक उपचार में समय गंवाना गंभीर समस्या बन सकता है। WHO के मुताबिक जहरीले सांप के काटने पर उचित एंटीवेनम उपचार अधिकांश विषैले प्रभावों को रोकने या उलटने में प्रभावी होता है। इसलिए सांप के काटने की आशंका होने पर पीड़ित को जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि आसपास दिखाई देने वाला हर सांप जहरीला नहीं होता। ऐसे में सांप को पहचानने के प्रयास में समय गंवाने के बजाय पीड़ित को तत्काल चिकित्सा सुविधा दिलाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
करैत के दंश में कम दर्द होने से न बरतें लापरवाही
आजाद सिंह ने भारतीय नाग, कॉमन करैत और रसेल वाइपर को भारत में पाए जाने वाले प्रमुख विषैले सांपों में बताया। उन्होंने खास तौर पर कॉमन करैत के बारे में जागरूक किया। उनके अनुसार करैत का दंश कई बार कम दर्द वाला हो सकता है, जिससे व्यक्ति इसे गंभीर नहीं समझता और इलाज में देरी कर देता है।
WHO के अनुसार जहरीले सांप के काटने के बाद लक्षण तुरंत स्पष्ट दिखाई देना जरूरी नहीं है। इसलिए केवल दर्द, सूजन या दंश के निशान देखकर खतरे का अंदाजा लगाना उचित नहीं है और चिकित्सा सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
रसेल वाइपर के बारे में उन्होंने बताया कि इसका विष शरीर में गंभीर प्रभाव डाल सकता है और इसके दंश में तेज दर्द तथा रक्तस्राव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे मामलों में भी तत्काल अस्पताल पहुंचना जरूरी है।
सर्पदंश के बाद क्या करें?
आजाद सिंह ने बताया कि सांप के काटने के बाद पीड़ित को शांत रखने की कोशिश करनी चाहिए और जिस अंग पर दंश हुआ है, उसे यथासंभव स्थिर रखना चाहिए। पीड़ित को खुद चलाकर ले जाने के बजाय सहायता से अस्पताल पहुंचाना बेहतर है।
WHO भी सर्पदंश के बाद व्यक्ति को पूरी तरह स्थिर रखने और जल्द से जल्द स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचाने की सलाह देता है। शरीर पर पहनी हुई अंगूठी, कड़ा या अन्य कसाव वाली चीजें सूजन आने से पहले हटा देनी चाहिए।
क्या न करें?
सर्पदंश के बाद घाव पर चीरा लगाने, जहर चूसने, कसकर रस्सी या टॉर्निकेट बांधने तथा झाड़-फूंक या अप्रमाणित घरेलू उपचार में समय गंवाने से बचना चाहिए। WHO के अनुसार ये तरीके नुकसानदेह हो सकते हैं और इलाज में देरी कर सकते हैं।
नीम की पत्ती चबाकर जहर की पहचान करने या किसी घरेलू नुस्खे से यह पता लगाने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए कि सांप जहरीला है या नहीं। ऐसे प्रयोगों में कीमती समय नष्ट हो सकता है।
जागरूकता ही बचाव का पहला कदम
आजाद सिंह ने लोगों से अपील की कि सांप दिखाई देने पर उसे मारने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखें और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की मदद लें। वहीं खेतों और ग्रामीण इलाकों में रात के समय जूते पहनने, घर के आसपास चूहों और कचरे को नियंत्रित रखने तथा सोते समय मच्छरदानी को ठीक से लगाने जैसी सावधानियां सर्पदंश के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।
19 सितंबर को मनाया जाने वाला International Snakebite Awareness Day 2026 इस वर्ष सर्पदंश से होने वाली दिव्यांगता और उसके छिपे प्रभाव पर केंद्रित है। WHO के मुताबिक समय पर एंटीवेनम और बेहतर जागरूकता सर्पदंश से होने वाली गंभीरता और मौतों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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