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कांशीराम अस्पताल में बढ़ीं मरीजों की सुविधाएं, 24 घंटे रेबीज इंजेक्शन और लैब-ईसीजी की सुविधा

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10 बेड का आईसीयू शुरू, रात में प्रसव ऑपरेशन की सुविधा भी उपलब्ध; 42 बेड की पीआईसीयू जल्द शुरू होने की उम्मीद

120 बेड के अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार, डॉक्टर और मैनपावर की कमी अब भी बड़ी चुनौती

विजय वर्मा,विक्की सिंह 

कानपुर। कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय एवं ट्रामा सेंटर में मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। हाल ही में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) का कार्यभार संभालने वाले डॉ. पीयूष मिश्रा के प्रयासों से अस्पताल में कई सुविधाओं को बढ़ाया गया है। अब मरीजों को 24 घंटे एंटी रेबीज इंजेक्शन, लैब और ईसीजी जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ गंभीर मरीजों के लिए 10 बेड का आईसीयू भी शुरू किया गया है।

120 बेड वाले इस अस्पताल में लंबे समय से कुछ सुविधाएं सीमित समय में उपलब्ध होने के कारण मरीजों को परेशानी होती थी। अब अस्पताल प्रशासन का जोर इमरजेंसी सेवाओं को मजबूत करने और मरीजों को जरूरत के समय अस्पताल में ही उपचार व जांच उपलब्ध कराने पर है।


24 घंटे मिलेगा एंटी रेबीज इंजेक्शन

अस्पताल में सबसे अहम बदलाव एंटी रेबीज इंजेक्शन की सुविधा को लेकर हुआ है। पहले यहां एंटी रेबीज वैक्सीन लगाने का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित था। इसके बाद आने वाले मरीजों को परेशानी होती थी और उन्हें दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता था।

अब अस्पताल में 24 घंटे एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे कुत्ते या अन्य जानवरों के काटने के बाद रात में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को भी उपचार मिलने में सहूलियत होगी।


रात में भी प्रसव ऑपरेशन की सुविधा

गर्भवती महिलाओं के लिए भी अस्पताल में व्यवस्थाओं को बेहतर किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर अब रात के समय प्रसव के लिए ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

इसके साथ ही इमरजेंसी सेवाओं को भी विस्तार दिया गया है, ताकि गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता और आवश्यक उपचार मिल सके।

10 बेड का आईसीयू शुरू

कांशीराम अस्पताल में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए 10 बेड के आईसीयू का संचालन शुरू कर दिया गया है। आईसीयू में गंभीर रोगियों की निगरानी और आवश्यक उपचार की व्यवस्था की गई है।

इस सुविधा के शुरू होने से गंभीर हालत में आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे अस्पताल में रेफर करने की जरूरत कम होने की उम्मीद है। अस्पताल प्रशासन का प्रयास है कि गंभीर मरीजों को उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अस्पताल में ही आवश्यक उपचार मिल सके।

अब 24 घंटे लैब और ईसीजी जांच पर जोर

इमरजेंसी मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल में 24 घंटे लैब और ईसीजी जांच की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इससे रात के समय अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को आवश्यक जांच के लिए इंतजार या बाहर जाने की परेशानी कम होगी।

24 घंटे लैब सुविधा से गंभीर मरीजों की जरूरी पैथोलॉजी जांच समय पर हो सकेगी। वहीं, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या हृदय संबंधी लक्षण वाले मरीजों की तत्काल ईसीजी जांच से डॉक्टरों को उपचार शुरू करने में मदद मिलेगी।


42 बेड की पीआईसीयू जल्द शुरू होने की उम्मीद

बच्चों के गंभीर उपचार के लिए अस्पताल में 42 बेड की पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है। अस्पताल के पीछे पीआईसीयू की बिल्डिंग वर्ष 2023 में बनकर तैयार हुई थी, लेकिन मैनपावर और आवश्यक उपकरणों की कमी के कारण अब तक इसका संचालन नहीं हो सका।

सीएमएस डॉ. पीयूष मिश्रा के प्रयासों से पीआईसीयू शुरू कराने की प्रक्रिया में तेजी आई है। इसके संचालन के लिए जिला स्वास्थ्य समिति के समक्ष प्रस्ताव रखा गया था, जिसे तत्कालीन जिलाधिकारी की मंजूरी मिली। इसके बाद सीडीओ को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

सीडीओ की ओर से गठित समिति को 15 दिनों में रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी दी गई है। रिपोर्ट के बाद पीआईसीयू के संचालन का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। इसके शुरू होने से गंभीर रूप से बीमार बच्चों को अस्पताल में ही बेहतर और समय पर उपचार मिल सकेगा।


डॉक्टर और मैनपावर की कमी अब भी चुनौती

अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, लेकिन डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य मैनपावर की कमी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सीमित स्टाफ के बीच मरीजों का दबाव बढ़ने से व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना मुश्किल होता है।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए मरीजों को अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। सीएमएस डॉ. पीयूष मिश्रा के अनुसार, मरीजों को इलाज के लिए अनावश्यक रूप से दूसरे अस्पतालों में रेफर न करना पड़े, इसके लिए व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है।

अस्पताल प्रशासन की ओर से शासन स्तर पर आवश्यक डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य मैनपावर उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई गई है। पर्याप्त संसाधन मिलने पर 120 बेड वाले इस अस्पताल में मरीजों के लिए चिकित्सा सेवाओं का और विस्तार किया जा सकता है।

 

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