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स्वच्छता के संदेश के बीच गंदगी से कराह रहा अमृतपुर तहसील मुख्यालय

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बैनर और शपथ तक सीमित रह गया अभियान?

अधिकारियों की नाक के नीचे पसरी गंदगी व्यवस्था पर उठा रही सवाल, तहसील परिसर में जगह-जगह कूड़े के ढेर और उगी झाड़ियां, शौचालय भी बदहाल

लक्ष्मी शरण सिंह राठौड़

फर्रुखाबाद l राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती से शुरू होने वाले स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रमों के बीच सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों को साफ-सुथरा रखने के दावों की जमीनी हकीकत कई जगह अलग तस्वीर पेश करती नजर आती है। प्रधानमंत्री से लेकर प्रदेश के मुखिया और प्रशासनिक अधिकारी समय-समय पर स्वच्छता अभियान को लेकर लोगों को जागरूक करते हैं। कार्यक्रम आयोजित होते हैं, स्वच्छता की शपथ दिलाई जाती है और जगह-जगह स्वच्छता के संदेश वाले होर्डिंग लगाए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि इन अभियानों का असर सरकारी कार्यालयों के परिसर में कितना दिखाई दे रहा है?

तहसील परिसर में ही स्वच्छता अभियान को आईना दिखाती गंदगी

फर्रुखाबाद जनपद का अमृतपुर तहसील मुख्यालय इन दिनों स्वच्छता व्यवस्था की बदहाली की तस्वीर सामने रखता नजर आ रहा है। तहसील परिसर में जगह-जगह बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हैं। कई स्थानों पर कूड़े के ढेर नजर आते हैं। परिसर में आने वाले फरियादियों और कर्मचारियों के लिए उपलब्ध शौचालय भी साफ-सफाई के अभाव से जूझते दिखाई देते हैं।

जिस तहसील परिसर से ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी होती है, उसी परिसर में स्वच्छता व्यवस्था का यह हाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।


अधिकारियों की नजर के सामने भी नहीं सुधरी व्यवस्था

तहसील मुख्यालय कोई दूर-दराज का सार्वजनिक स्थल नहीं है। यहां प्रतिदिन अधिकारी, कर्मचारी, फरियादी और विभिन्न कार्यों से आने वाले ग्रामीण पहुंचते हैं। इसके बावजूद परिसर में सफाई व्यवस्था का समुचित प्रबंध दिखाई न देना जिम्मेदार विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

स्वच्छता अभियान के दौरान बड़े-बड़े संदेशों के माध्यम से लोगों को अपने आसपास सफाई रखने के लिए प्रेरित किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकारी कार्यालय का अपना परिसर ही गंदगी और झाड़ियों से घिरा हो तो आम लोगों को स्वच्छता का संदेश किस प्रभाव के साथ दिया जाएगा?

समाचार प्रकाशित होने के बाद भी नहीं बदली तस्वीर

अमृतपुर तहसील परिसर की सफाई व्यवस्था को लेकर समय-समय पर समाचार पत्रों में खबरें भी प्रकाशित होती रही हैं। खबरों के माध्यम से जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान भी समस्या की ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर पुराने ढर्रे पर लौटती दिखाई देती है।

इसी वजह से लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सफाई व्यवस्था को लेकर जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती? क्या अभियान सिर्फ विशेष दिवसों पर कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित है या सरकारी कार्यालयों की नियमित सफाई भी इसकी प्राथमिकता में शामिल है?

होल्डिंग से ज्यादा जरूरी है धरातल पर सफाई

स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए होर्डिंग, पोस्टर, शपथ और कार्यक्रम निश्चित रूप से आवश्यक हैं, लेकिन इनका वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर भी नियमित सफाई दिखाई दे।

अमृतपुर तहसील परिसर की स्थिति यही सवाल सामने रखती है कि स्वच्छता अभियान की तस्वीर कैमरे के सामने खिंचने वाले कार्यक्रमों तक सीमित रहेगी या सरकारी परिसरों में भी इसका स्थायी असर दिखाई देगा?

अब नियमित सफाई व्यवस्था की दरकार

स्थानीय लोगों का कहना है कि तहसील परिसर में नियमित सफाई, झाड़ियों की कटाई, कूड़े के तत्काल निस्तारण और शौचालयों की साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। विशेष अभियानों के दौरान एक दिन सफाई कराने के बजाय इसकी नियमित निगरानी होनी चाहिए, ताकि परिसर लंबे समय तक स्वच्छ बना रहे।

स्वच्छता अभियान का असली मूल्यांकन मंच पर ली गई शपथ, लगाए गए होर्डिंग या खिंचवाई गई तस्वीरों से नहीं, बल्कि उस स्थान की वास्तविक स्थिति से होना चाहिए जहां आम नागरिक रोज पहुंचता है। अमृतपुर तहसील परिसर की गंदगी इसी कसौटी पर प्रशासनिक व्यवस्था से जवाब मांगती नजर आ रही है।


 

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