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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आनन्द उपाध्याय की अगुवाई में बाढ़ के पानी के बीच गांव-गांव पहुंची स्वास्थ्य टीम

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184 मरीजों की जांच कर निशुल्क जांचें दवाइयां करवाई मुहैया, आशा की मड़ैया और तौफीक मड़ैया में लगे शिविर, त्वचा रोग और बुखार के मरीजों की संख्या अधिक; 12 लोगों को ओआरएस वितरित

लक्ष्मी शरण सिंह राठौड़

फ़र्रूख़ाबाद l राजेपुर बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की आशंका के बीच स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। ग्रामीणों को उपचार के लिए दूर स्वास्थ्य केंद्रों तक न जाना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचकर जांच और उपचार कर रही हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय के निर्देशन में राजेपुर क्षेत्र की आशा की मड़ैया और तौफीक मड़ैया में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। दोनों शिविरों में कुल 184 मरीजों की जांच कर उन्हें बीमारी के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गईं।

बाढ़ के बाद जलभराव और दूषित पानी के कारण त्वचा संबंधी संक्रमण, बुखार और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने शिविरों में मरीजों की जांच के साथ-साथ उन्हें साफ-सफाई, सुरक्षित पेयजल, खान-पान और बाढ़ के पानी से बचाव को लेकर भी जागरूक किया। स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों को सलाह दी कि किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य टीम से संपर्क करें।


आशा की मड़ैया में 69 मरीजों की जांच

पीएचसी सबलपुर के अंतर्गत आशा की मड़ैया में 69 मरीजों की जांच की गई। यहां त्वचा संबंधी बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या सबसे अधिक रही। जांच में 40 मरीज त्वचा संबंधी बीमारी, 13 बुखार, 10 जोड़ों के दर्द, तीन मधुमेह और तीन मरीज उच्च रक्तचाप से संबंधित पाए गए।

चिकित्सकों ने मरीजों की स्थिति के अनुसार उपचार शुरू किया और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराईं। स्वास्थ्य टीम ने विशेष रूप से त्वचा संबंधी रोगों से बचाव के लिए साफ-सफाई रखने तथा बाढ़ के दूषित पानी के संपर्क से बचने की सलाह दी। शिविर में डॉ. नेहा, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी प्रशांत सहित स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे।

तौफीक मड़ैया में 115 मरीज पहुंचे

वहीं तौफीक मड़ैया में लगाए गए स्वास्थ्य शिविर में 115 मरीजों की जांच की गई। यहां भी त्वचा संबंधी बीमारी और बुखार के मरीज सामने आए। जांच में 26 मरीज त्वचा संबंधी समस्या, 23 बुखार, 15 सर्दी-खांसी, 15 आंख-कान संबंधी समस्या, आठ डायरिया और पांच मरीज गठिया से पीड़ित मिले। इसके अलावा 10 मरीज अन्य एवं पुरानी बीमारियों से संबंधित पाए गए।

डायरिया और अन्य बीमारियों से बचाव को ध्यान में रखते हुए जरूरतमंद लोगों को 12 ओआरएस पैकेट उपलब्ध कराए गए। स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों को उबला या सुरक्षित पानी पीने, भोजन को ढककर रखने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी।

तौफीक मड़ैया में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए डॉ. अभिनव, फार्मासिस्ट अनुज कुमार, स्टाफ नर्स अंशिका कटियार और लैब टेक्नीशियन ललित कुमार सहित स्वास्थ्य टीम मौजूद रही। मेडिकल मोबाइल टीम के माध्यम से भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गईं।

बीमारी पर नजर, जरूरत पर पहुंचेगी मोबाइल टीम

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ के दौरान और पानी उतरने के बाद संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाने के साथ ही मोबाइल मेडिकल टीमों को भी सक्रिय रखा गया है।

सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए परेशान नहीं होने दिया जाएगा। विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं। जहां जरूरत होगी, वहां स्वास्थ्य शिविर और मोबाइल मेडिकल टीम भेजकर मरीजों की जांच, उपचार और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग की इस मुहिम में आशीष शुक्ला सहित स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारियों और टीम के सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही। विभाग का जोर इस बात पर है कि बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों तक समय रहते स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें और बीमारी को गंभीर रूप लेने से पहले ही उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

 

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