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दर्द के पीछे छिपा था चौंकाने वाला सच—पेट से निकलीं सुइयां और चूड़ियां
- दैनिक लोक भारती
- 04 Sep, 2026
पवन द्विवेदी
प्रयागराज। 24 वर्षीय युवती विजमा देवी पत्नी बृजेश कुमार, निवासिनी ग्राम नगरा चकिया, हतिगवां तहसील खागा फतेहपुर की नारायण स्वरूप हॉस्पिटल, प्रयागराज के चिकित्सकों ने अत्यंत जटिल ऑपरेशन कर जान बचाई। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण युवती में लंबे समय से सुई, हेयर-पिन तथा चूड़ियों के टुकड़े जैसी अखाद्य वस्तुएं निगलने की असामान्य आदत विकसित हो गई थी। चिकित्सा विज्ञान में इस प्रकार की समस्या को “पिका (Pica)” कहा जाता है।
परिजनों के अनुसार युवती कुछ समय से लगातार कमजोर होती जा रही थी और उसका वजन भी काफी कम हो गया था। स्थिति गंभीर होने पर उसे नारायण स्वरूप हॉस्पिटल लाया गया। अस्पताल में एक्स-रे एवं सीटी स्कैन जांच कराई गई, जिसमें पेट और आंतों के भीतर कई नुकीली धातु की वस्तुएं दिखाई दीं। इनमें से कुछ वस्तुएं आंत की दीवार को छेदकर पेट के अन्य हिस्सों तक पहुंच गई थीं। एक नुकीली वस्तु ने दाहिने गुर्दे के आसपास भी गंभीर चोट पहुंचाई थी। आंत में छेद होने के कारण पेट में संक्रमण फैलने और मरीज की जान जाने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों की बहुविषयक टीम ने तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान पेट तथा आंतों से कई सुइयां, हेयर-पिन और चूड़ी के तीन नुकीले टुकड़े सावधानीपूर्वक निकाले गए। आंत में हुए छेद एवं क्षतिग्रस्त हिस्सों का उपचार किया गया। संक्रमण से मरीज की जान बचाने और आंत को ठीक होने का समय देने के लिए अस्थायी रूप से मल त्याग का रास्ता पेट से बाहर बनाया गया।
यह जटिल ऑपरेशन डॉ. राजीव सिंह, डॉ. शेफाली चंद्रा, डॉ. विशाल केवलानी, डॉ. प्रभात पांडे तथा डॉ. अमन की टीम ने सफलतापूर्वक किया। ऑपरेशन थिएटर टेक्नीशियन जय प्रकाश और पीयूष पटेल ने भी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
ऑपरेशन के साथ-साथ मरीज की मानसिक स्वास्थ्य समस्या के उपचार पर भी विशेष ध्यान दिया गया। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष केसरवानी की निगरानी में मरीज की काउंसलिंग एवं आवश्यक उपचार शुरू किया गया। चिकित्सकों के अनुसार अब मरीज की स्थिति स्थिर है, वह सामान्य रूप से भोजन लेने लगी है और उसके व्यवहार एवं मानसिक स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। भविष्य में ऐसी वस्तुएं दोबारा निगलने से रोकने के लिए उसकी नियमित मानसिक स्वास्थ्य निगरानी और पारिवारिक सहयोग जारी रखा जाएगा।
नारायण स्वरूप हॉस्पिटल के निदेशक एवं वरिष्ठ सर्जन डॉ. राजीव सिंह ने बताया, “यह अत्यंत दुर्लभ और जोखिमपूर्ण मामला था। नुकीली वस्तुओं के कारण आंत में कई स्थानों पर चोट और छेद हो गए थे तथा पेट के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा था। समय पर जांच, तत्काल ऑपरेशन और सर्जरी, एनेस्थीसिया तथा मानसिक रोग विशेषज्ञों के समन्वित प्रयास से मरीज की जान बचाई जा सकी।”
उन्होंने कहा कि पिका केवल खाने की गलत आदत नहीं, बल्कि कई बार मानसिक स्वास्थ्य समस्या, तनाव, पारिवारिक परिस्थितियों अथवा पोषण संबंधी कमी से जुड़ा व्यवहार हो सकता है। यदि कोई बच्चा या वयस्क मिट्टी, कांच, धातु, सुई, बाल, कपड़ा, प्लास्टिक या अन्य अखाद्य वस्तुएं खाता या निगलता दिखाई दे तो इसे छिपाना या डांटना नहीं चाहिए। ऐसे व्यक्ति को तत्काल चिकित्सक एवं मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास ले जाना चाहिए।
नारायण स्वरूप हॉस्पिटल की टीम ने इस दुर्लभ और गंभीर मामले में सफल उपचार को चिकित्सा विज्ञान, टीमवर्क तथा समय पर लिए गए निर्णय की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
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