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अमृतपुर में तालाबों पर कब्जा, जलकुंभी ने जकड़ी जलनिकासी, वर्षों से नहीं हुई सिल्ट सफाई, मूसलाधार बारिश में घरों तक पहुंचा गंदा पानी; डीपीआरओ ने प्रधान-सचिव पर कार्रवाई के दिए संकेत

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लक्ष्मी शरण सिंह राठौड़

फर्रुखाबाद l अमृतपुर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने कस्बे की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। वर्षों से तालाबों की सिल्ट सफाई न होने और जलकुंभी के मकड़जाल से तालाबों की हालत बदहाल है। ऊपर से अधिकांश तालाब अतिक्रमण की चपेट में हैं। ऐसे में बारिश का पानी तालाबों में समाने के बजाय आबादी की ओर पहुंच रहा है। तालाबों के आसपास रहने वाले लोगों के घरों तक गंदा पानी पहुंचने से परेशानी बढ़ गई है। कस्बावासियों का कहना है कि समय रहते तालाबों की सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती तो बारिश में यह स्थिति नहीं बनती।

अमृतपुर कस्बे में करीब एक दर्जन तालाब बताए जा रहे हैं। इनमें अधिकांश तालाब चारों तरफ से अतिक्रमण की गिरफ्त में हैं। कई तालाबों में जलकुंभी इस कदर फैल गई है कि पानी दिखाई देना तक मुश्किल है। गाद और जलकुंभी के कारण तालाबों की जलधारण क्षमता लगातार कम होती जा रही है। कुछ तालाबों का अस्तित्व भी अतिक्रमण के कारण संकट में बताया जा रहा है।


बारिश ने उजागर की वर्षों की अनदेखी

तालाबों की नियमित सिल्ट सफाई न होने से उनमें लगातार गाद जमा होती गई। जलकुंभी और कूड़े-कचरे ने स्थिति को और खराब कर दिया। अब लगातार बारिश के बाद जलनिकासी बाधित होने से गलियों और आबादी में पानी भर रहा है। तालाबों की समय से सफाई होती तो बारिश के पानी को रोकने और उसकी निकासी में काफी मदद मिल सकती थी।

समस्या से परेशान कस्बावासियों ने अमृतपुर विधायक सुशील कुमार शाक्य से तालाबों की सिल्ट सफाई कराने की गुहार लगाई। कस्बावासियों के अनुसार विधायक ने प्रधान पर दबाव बनाकर तालाबों की सफाई कराने का सुझाव दिया।


डीपीआरओ ने माना मामला गंभीर, कार्रवाई के संकेत

मामला सामने आने पर जिला पंचायत राज अधिकारी अविनाश चंद ने तालाबों की सफाई न होने को गंभीरता से लिया। उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान अमृतपुर को तालाबों की सफाई कराने के निर्देश दिए गए थे। जानकारी मिली है कि प्रधान की ओर से एक सफाईकर्मी की ड्यूटी लगाई गई थी।

डीपीआरओ ने कहा कि एक सफाईकर्मी से तालाब की सिल्ट सफाई कैसे संभव है। यह गंभीर लापरवाही है। मामले में प्रधान और सचिव के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जल्द तालाबों की सिल्ट सफाई कराने की बात भी कही।

प्रधान बोले- अतिक्रमण के कारण जेसीबी पहुंचाना मुश्किल

ग्राम प्रधान सचिन देव तिवारी ने तालाबों की सफाई में अतिक्रमण को सबसे बड़ी बाधा बताया। उन्होंने कहा कि अमृतपुर में करीब एक दर्जन तालाब हैं और कोई भी तालाब पूरी तरह अतिक्रमण से अछूता नहीं है। कई तालाबों के चारों तरफ मकान बने हैं। ऐसे में जेसीबी मशीन तालाब तक पहुंचाना मुश्किल है।

प्रधान ने बताया कि तालाबों तक जेसीबी पहुंचाकर सफाई कराने का प्रयास किया गया, लेकिन चारों तरफ निर्माण होने के कारण मशीन नहीं पहुंच सकी। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ तालाबों का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है और कई तालाबों की जमीन को पूर्व में आबादी में दर्ज कराए जाने की शिकायतें हैं।


विधायक के बयान पर प्रधान ने भी उठाए सवाल

विधायक सुशील कुमार शाक्य द्वारा प्रधान पर दबाव बनाकर तालाबों की सफाई कराने के सुझाव पर प्रधान सचिन देव तिवारी ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र में ग्राम पंचायतों के प्रधान और नगर पंचायत में नगर पंचायत अध्यक्ष विकास कार्य कराते हैं। ऐसे में विधायक निधि का उपयोग किन कार्यों में होता है, इस पर भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

प्रधान ने अमृतपुर कस्बे की जर्जर मुख्य सड़क का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सड़क लंबे समय से खराब है। ग्रामीणों के साथ विधायक को मौके पर ले जाकर सड़क की स्थिति दिखाई और कई बार निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक सड़क का निर्माण नहीं हो सका। प्रधान ने कहा कि जब सड़क की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो केवल प्रधान पर आरोप लगाना उचित नहीं है।

जिम्मेदारी की खींचतान में पिस रही जनता

तालाबों की बदहाली को लेकर कस्बावासियों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों की जिम्मेदारी को लेकर प्रधान और विधायक एक-दूसरे की ओर गेंद उछाल रहे हैं, जबकि बारिश का पानी घरों और रास्तों तक पहुंच रहा है। जनता को आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि धरातल पर समस्या का समाधान चाहिए।

कस्बावासियों का कहना है कि यदि तालाबों पर अतिक्रमण है तो ग्राम पंचायत को प्रशासन को लिखित सूचना देकर अतिक्रमण चिह्नित कराने और हटाने की कार्रवाई शुरू करानी चाहिए। तालाबों की पैमाइश, अतिक्रमण हटाने, चौहद्दी स्पष्ट करने और सिल्ट सफाई का काम एक साथ कराया जाए। तभी जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान संभव होगा।

अब देखने वाली बात होगी कि डीपीआरओ के निर्देश के बाद तालाबों की सफाई धरातल पर शुरू होती है या फिर बारिश थमने के साथ यह मामला भी जिम्मेदारों की फाइलों में दबकर रह जाता है।

 

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