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मूसलाधार बारिश आंधी में शहीदों की यादों पर भी टूटा कहर, विशालकाय यूकेलिप्टस गिरने से स्मारक की दीवार क्षतिग्रस्त

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अमृतपुर में तेज बारिश और हवाओं ने मचाई तबाही, रात में हुआ हादसा तो टली बड़ी अनहोनी; शहीद स्मारक को सुरक्षित कराने की उठी मांग 

लक्ष्मी शरण सिंह राठौड़

 फ़र्रूख़ाबाद l अमृतपुर बुधवार रात तेज आंधी और बारिश ने अमृतपुर कस्बे में जनजीवन को प्रभावित कर दिया। तेज हवाओं के बीच संविलियन विद्यालय परिसर में स्थित शहीद स्मारक के समीप खड़ा विशालकाय यूकेलिप्टस का पेड़ अचानक भरभराकर गिर पड़ा। पेड़ के गिरने से शहीद स्मारक की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि घटना रात के समय हुई, जिससे विद्यालय परिसर में बच्चों अथवा अन्य लोगों की मौजूदगी नहीं थी और बड़ा हादसा टल गया।

अमृतपुर का यह शहीद स्मारक केवल ईंट-पत्थरों से बनी एक संरचना नहीं, बल्कि देश की रक्षा और मातृभूमि की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर सपूतों की स्मृतियों का प्रतीक है। यहां आने वाले लोगों के लिए स्मारक शहीदों के त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति की याद दिलाता है। ऐसे में स्मारक की दीवार का क्षतिग्रस्त होना स्थानीय लोगों के लिए सामान्य घटना नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी पीड़ादायक है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बुधवार रात मौसम अचानक बिगड़ गया। तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू होते ही संविलियन विद्यालय परिसर में शहीद स्मारक के पास खड़ा विशाल यूकेलिप्टस का पेड़ तेज हवा का दबाव नहीं झेल सका। देखते ही देखते पेड़ जड़ समेत उखड़कर जमीन पर जा गिरा। पेड़ की भारी शाखाओं और तने की चपेट में आने से स्मारक की दीवार को नुकसान पहुंचा।


रात में हादसा, वरना बच्चों की जान पर बन सकती थी

हादसा रात के समय होने के कारण एक बड़ी अनहोनी टल गई। विद्यालय परिसर में दिन के समय बच्चों के साथ शिक्षक और आसपास के लोगों की भी आवाजाही रहती है। यदि यही पेड़ दिन के समय तेज हवाओं के बीच गिरता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विद्यालय परिसर में मौजूद बड़े और पुराने पेड़ों को लेकर चिंता जताई है।

लोगों का कहना है कि विद्यालय और शहीद स्मारक जैसे स्थानों पर सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जानी चाहिए। परिसर में खड़े विशालकाय एवं कमजोर पेड़ों का समय-समय पर निरीक्षण कराया जाए, ताकि किसी संभावित हादसे को पहले ही रोका जा सके।

शहीदों की स्मृति को संजोने के साथ सुरक्षा भी जरूरी

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षतिग्रस्त शहीद स्मारक की दीवार का तत्काल निरीक्षण कराकर उसकी मरम्मत कराई जाए। साथ ही विद्यालय परिसर और आसपास खड़े जर्जर अथवा हादसे का कारण बन सकने वाले बड़े पेड़ों का सर्वे कराया जाए। लोगों का कहना है कि जिस स्मारक में शहीदों की वीरगाथा और बलिदान की यादें संजोई गई हैं, उसकी सुरक्षा और गरिमा बनाए रखना भी समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

तेज आंधी में पेड़ का गिरना भले ही प्राकृतिक घटना हो, लेकिन इसने विद्यालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने समय रहते पेड़ों की छंटाई, कमजोर पेड़ों को हटाने और स्मारक की क्षतिग्रस्त दीवार को दुरुस्त कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में आंधी-बारिश के दौरान शहीदों की स्मृति और बच्चों की सुरक्षा दोनों पर संकट न आए।

 

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