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कागजों में दौड़ते शासनादेश, फाइलों में कैद आदेश

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अटल प्रतिमा से लेकर बायोमैट्रिक व्यवस्था तक, वर्षों बाद भी नहीं हुआ अमल

शोभित शुक्ला

बाराबंकी। शासन के आदेश यदि सिर्फ फाइलों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं, तो उनका जारी होना और अनुपालन की अपेक्षा करना दोनों ही बेमानी नजर आते हैं।

कुछ ऐसा ही आरोप लगाते हुए समाजसेवी पंकज श्रीवास्तव ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि 30 सितंबर 2025 के शासनादेश के तहत राजकीय इंटर कॉलेज, बाराबंकी में भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जानी थी।


जिलाधिकारी कार्यालय ने 27 अक्टूबर 2025 को इसके लिए आदेश भी जारी कर दिया, लेकिन महीनों बाद भी प्रतिमा स्थापना की प्रक्रिया धरातल पर नहीं उतर सकी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आदेश सिर्फ जारी करने के लिए थे या उनका पालन भी होना था।यही स्थिति बायोमैट्रिक उपस्थिति व्यवस्था की भी बताई गई है।

शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) के 18 अगस्त 2022 के आदेश में कर्मचारियों का वेतन बायोमैट्रिक उपस्थिति के आधार पर दिए जाने के निर्देश हैं, लेकिन आरोप है कि जिले के माध्यमिक शिक्षा विभाग में यह व्यवस्था आज तक प्रभावी नहीं हो सकी।

समाजसेवी ने जिलाधिकारी से दोनों मामलों में हस्तक्षेप कर जिला विद्यालय निरीक्षक को शासनादेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश देने की मांग की है।

साथ ही सवाल भी उठाया है कि जब शासन के आदेश ही अमल का इंतजार करते रहें, तो जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी?

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