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हड़ताल पर बैठे बस कंडक्टर,आरएम के आश्वासन पर हटे,5 घंटे बाद शुरू हुआ सीटी बस संचालन

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कंडक्टरों ने दिया 24 घंटे का दिया अल्टीमेटम

संजय मिश्रा

गोरखपुर मानक से कम वेतन भुगतान समेत अन्य मांगों को लेकर सोमवार सुबह से सिटी बस सेवा ठप हो गई थी। गोरखपुर सिटी बस के कंडक्टरों ने चार्जिंग पॉइंट स्टेशन महेसरा में बसें खड़ी कर हड़ताल शुरू कर दी और धरने पर बैठ गए।

हालांकि रीजनल मैनेजर लव कुमार के समझाने बुझाने पर कंडक्टरों का धरना लगभग 5 घंटे बाद खत्म हुई, जिसमें पहचान को में तीन प्रतिनिधियों को चुना गया है, जिसे कल तक का टाइम लिया गया है। एसएस ट्रेडिंग कंपनी को बुलाकर बात की जाएगी और सारी समस्याओं का निदान किया जाएगा, जिस पर धरना समाप्त हुआ। पहली बस लगभग 11 बजे पर निकली।

 हड़ताल से शहरी यात्रियों झेलनी पड़ी परेशानी 

 हड़ताल के कारण शहर के हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह 5 बजे से ही बसें सड़कों पर फर्राटा भरने लगती हैं। स्कूल और नौकरीपेशा वाले लोग इन बसों से ही यात्रा करते हैं। सुबह बस न आने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा।


 नई एजेंसी मानक से कम कर रही वेतन भुगतान 

 कंडक्टरों का आरोप है कि पिछली कंपनी का टेंडर खत्म होने के बाद नई कंपनी को वेतन की जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी तय मानक से कम वेतन दे रही है। जबकि सारी चीजें पहले से तय थी। अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसी नाराजगी में सोमवार सुबह सभी कंडक्टर महेसरा डिपो पहुंचे और बसों को वहीं खड़ा कर दिया।

 धरने पर बैठे कंडक्टर, बोले- पहले मांग हो पूरी, फिर ड्यूटी

 धरने पर बैठे कंडक्टरों ने कहा कि महंगाई के दौर में घर चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की फीस और घर का खर्च वेतन से ही चलता है। जब तक तय वेतन भुगतान नहीं हो जाता और भविष्य में समय पर देने का आश्वासन नहीं मिलता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

 यात्रियों को उठानी पड़ी परेशानी

 सिटी बस सेवा बंद होने से ऑफिस, कॉलेज और अस्पताल जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई। महेसरा, मोहद्दीपुर, रेलवे स्टेशन, कचहरी और अन्य रूटों पर यात्री घंटों बस का इंतजार करते रहे। मजबूरी में लोगों को ऑटो और ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ा, जिससे किराया भी कई गुना बढ़ गया।

छात्रों और नौकरीपेशा लोगों ने कहा कि अचानक बस सेवा बंद होने से उनकी दिनचर्या प्रभावित हुई है। कई लोग लेट होकर ऑफिस और कॉलेज पहुंचे।

शहर में 27 सिटी बसें चलती हैं। जिसमे करीब 80 कंडक्टर तैनात किए गए हैं। सभी महेसरा चार्जिंग प्वाइंट पर बस खड़ी कर धरने पर बैठ गए हैं। अभी तक जिम्मेदारी अधिकारी वहां नहीं पहुंच सका है।

 कंडक्टरों की प्रमुख मांगें-

 1. सैलरी 6 रुपये प्रति किलोमीटर की जाए।

 2. बस की किलोमीटर के हिसाब से सैलरी - जो भी किलोमीटर बस चले उसी के अनुसार भुगतान हो।

 3. DD वापसी - डिमांड ड्राफ्ट/ जमानत की रकम वापस की जाए।

 4. सैलरी का समय निर्धारित हो हर महीने एक निश्चित तारीख पर वेतन दिया जाए।

 5. सैलरी स्लिप + EPF + ड्रेस + ज्वाइनिंग लेटर -समय से सभी कागज और सुविधाएं दी जाएं। अभी EPF और स्लिप नहीं मिल रही।

 6. गाड़ी खराब होने पर 180 KM का भुगतान - अगर बीच रास्ते में बस खराब हो जाए तो परिचालक को 180 KM का मानदेय दिया जाए।

 7. स्टाफ की कमी पर सहयोग अगर किसी परिचालक के साथ कोई समस्या हो तो कंपनी या सिटी ट्रांसपोर्ट स्टेशन से तुरंत मदद मिले।

 8. छुट्टी के बाद ड्यूटी की गारंटी - अपनी मांग रखने पर किसी परिचालक को ड्यूटी से न हटाया जाए। छुट्टी लेने पर वापस ड्यूटी दी जाए।

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