अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की निजी संपत्ति उनके दूसरे कार्यकाल के पहले साल में 1.4 अरब डॉलर बढ़ गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से क्रिप्टोकरेंसी और वैश्विक रियल एस्टेट निवेशों से हुई। रिपोर्ट में सत्ता और व्यापार के बीच गहरे जुड़ाव का भी उल्लेख है, जिसमें ट्रंप की नीतियां उनके निजी हितों को मजबूत करती दिख रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ट्रंप की नीतियों का असर आम अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भारी पड़ा है। औसत अमेरिकी आय लगभग 83 हजार डॉलर पर स्थिर रही, जबकि महंगाई बढ़ती रही। इस तुलना में राष्ट्रपति ट्रंप और एक आम अमेरिकी की कमाई के बीच एक साल में ही 16,720 गुना का अंतर पैदा हो गया।
राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने अपने नाम को वैश्विक ब्रांड के रूप में और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाया। उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रही 20 परियोजनाओं को लाइसेंस देकर करीब 2.3 करोड़ डॉलर की कमाई की।
पुणे स्थित 'ट्रंप वर्ल्ड सेंटर' भारत में पहला ट्रंप-ब्रांडेड कमर्शियल रियल एस्टेट प्रोजेक्ट होगा। इस परियोजना से ट्रंप को अनुमानित 28.9 करोड़ डॉलर की कमाई होने की संभावना है, जो उनकी अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग रणनीति का हिस्सा है।
ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में टैरिफ का इस्तेमाल अपने निजी लाभ के लिए किया। उदाहरण के लिए, वियतनाम पर लगाए गए 46 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया, जब हनोई में ट्रंप आर्गनाइजेशन के 1.5 अरब डॉलर के गोल्फ कॉम्प्लेक्स को मंजूरी मिली।
हालांकि, ट्रंप को सबसे ज्यादा मुनाफा क्रिप्टोकरेंसी से हुआ। ट्रंप परिवार की कंपनी 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' और एक मीम क्वाइन के जरिए 86.7 करोड़ डॉलर से अधिक की कमाई हुई, जो उनकी संपत्ति वृद्धि का प्रमुख स्रोत बनी

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