देवरिया। उत्तर प्रदेश शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग में प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कुशीनगर में तैनात डॉक्टर. राम जियावन मौर्य को देवरिया का नया जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया है। शासन द्वारा 30 मई को जारी आदेश के अनुसार उन्हें तत्काल प्रभाव से जनपद में तैनाती दी गई है।
शासन ने नए बीएसए को शीघ्र कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए थे। हालांकि इस बदलाव के बीच एक बड़ा सवाल अब भी चर्चा में है कि सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में नामजद तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
गोरखपुर के गुलरिहा थाने में मृतक शिक्षक की पत्नी की तहरीर पर तत्कालीन (पूर्व) बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह एवं एक अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच शुरू की और दोनों आरोपियों पर 25-25 हजार का इनाम भी घोषित किया गया, लेकिन घटना के लगभग 100 दिन बाद भी दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
शिक्षकों से वेतन बहाली कराने के एवज में लिए थे 16-16 लाख रुपए
दर्ज एफआईआर के अनुसार, कृष्ण मोहन सिंह की नियुक्ति वर्ष 2016 में सहायक अध्यापक पद पर हुई थी। बाद में उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई। इस कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने अन्य शिक्षकों के साथ उच्च न्यायालय की शरण ली। न्यायालय से राहत मिलने के बावजूद मामले में विवाद जारी रहा और कई आदेशों तथा पुनर्विचार की प्रक्रिया के बाद भी समाधान नहीं निकल सका।
मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया है कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन के लिए बीएसए कार्यालय में कार्यरत लिपिक द्वारा कथित रूप से शिक्षकों से 16-16 लाख रुपये की मांग की गई। तहरीर में यह भी आरोप है कि रकम न देने पर प्रतिकूल आदेश पारित करने और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई थी।परिजनों का आरोप है कि 20 फरवरी 2026 को कथित अपमान और धमकी के बाद कृष्ण मोहन सिंह गहरे मानसिक तनाव में आ गए थे। इसके बाद 20/21 फरवरी की रात उन्होंने आत्महत्या कर ली। घटना के बाद सामने आए कथित सुसाइड नोट और वीडियो ने पूरे मामले को प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।
आखिर क्यों नहीं हो रही आरोपी बीएसए और लिपिक की गिरफ्तारी
वही देवरिया में नए बीएसए की तैनाती के साथ जहां शिक्षा विभाग में नई शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक आत्महत्या प्रकरण में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी और जांच की प्रगति को लेकर सवाल अभी भी कायम हैं। जनता और शिक्षक संगठन यह जानना चाहते हैं कि आखिर 100 दिन बीत जाने के बाद भी मामले में निर्णायक कार्रवाई कब होगी।
बीएसए को बचाने के आरोप पर भड़क गए थे जिला प्रभारी मंत्री दयाशंकर सिंह
देवरिया। प्रभारी मंत्री दयाशंकर सिंह का एक शिक्षक नेता को सरेआम फटकारते और चेतावनी देते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा था, हालांकि बीएसए भी उन्हीं के गृह जनपद की रहने वाली है, ऐसा आशंका व्यक्त की जा रही कि मंत्री के दबाव में जिला प्रशासन अभी तक को गिरफ्तार नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि परिवहन मंत्री जनपद के प्रभारी मंत्री भी हैं और एक बार फिर विवादों में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा 24 फरवरी का एक वीडियो सरकार की कार्यशैली और शिक्षकों के प्रति संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है. वीडियो में मंत्री एक शिक्षक नेता को उंगली दिखाकर धमकाते और बाहर जाने की चेतावनी देते नजर आ रहे हैं.