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सपनों को संकल्प में बदलें युवा: राज्यपाल

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जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30 वां दीक्षांत समारोह सोमवार को महंत अवेद्यनाथ संगोष्ठी हाल में मनाया गया।   कुलाधिपति,    राज्यपाल उत्तर प्रदेश श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले स्नातक एवं स्नातकोत्तर 83 मेधावियों   को 84 स्वर्ण पदक प्रदान की।  339 शोधार्थियों को पीएच.डी. एवं एक को डीएससी की उपाधि दी। 39 छात्राओं को एचपीबी वैक्सीनेशन हुआ।  

कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि ज्ञान, साधना और परिश्रम की इस पावन धरती पर आकर स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस कर रही हूं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और चरित्र निर्माण की प्रयोगशालाएं हैं। विद्यार्थियों को अपने भविष्य के साथ-साथ भारत के भविष्य को भी दिशा देने का संकल्प लेना चाहिए।   उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वे अधिक परिश्रम करें और छात्राओं से प्रेरणा लें। बेटियां अपने भविष्य के प्रति अधिक सजग हैं और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।  

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल रोजगार खोजने की मानसिकता तक सीमित न रहें, बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमी बनने का लक्ष्य रखें। आज भारत का युवा स्टार्टअप, नवाचार और तकनीक के माध्यम से दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है।   विद्यार्थियों को अपने सपनों को संकल्प में बदलना होगा तथा समाज, राष्ट्र और मानवता के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण भी उतना ही आवश्यक है।  मुख्य अतिथि मेजर जनरल गौरव गौतम (एडीजी, उ.प्र. एनसीसी) ने  कहा कि आज का पराक्रमी युवा राष्ट्र की पहली पंक्ति है।


उन्होंने कहा कि सिर्फ किताबों का ज्ञान ही पर्याप्त नहींय तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक कौशल और आत्मनुशासन आज की मांग हैं। मेजर जनरल ने एससीसी के अनुभवों से उदाहरण देते हुए अनुशासन, टीम वर्क और नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया तथा कहा कि ये गुण किसी भी करियर को ऊँचाइयाँ प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे एआई, डेटा साइंस और उद्यमशीलता जैसे भविष्योन्मुख क्षेत्र में खुद को प्रशिक्षित करें और रोजगारोन्मुखी कौशल सीखें ताकि वे प्रतिस्पर्धी बाजार में सफल हो  विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि आज प्राप्त होने वाला पदक और उपाधि केवल विद्यार्थियों की उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके माता-पिता, गुरुजनों और विश्वविद्यालय परिवार के वर्षों के परिश्रम एवं समर्पण का सम्मान है।

उन्होंने सभी पदक एवं उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज से उनके जीवन का एक नया अध्याय प्रारंभ हो रहा है।  विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह  ने विश्वविद्यालय के शैक्षिक और शोध की प्रगति का उल्लेख करते हुए एशिया एवं भारत रैंकिंग, एच-इन्डेक्स और प्रकाशन के आंकड़े बताए।  

 कुलसचिव डॉ. विनोद सिंह,  वित्त अधिकारी आत्म प्रकाश धर द्विवेदी, प्रो. वीके पांडेय, प्रो. मानस पांडेय, प्रो अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. प्रमोद यादव, प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो. रजनीश भास्कर, प्रो. रवि प्रकाश, डा. विजय सिंह, डॉ. राहुल सिंह, प्रो. रजनीश भास्कर,   समेत विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित थे।

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