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रामचरितमानस, लोकमंगल का अमृत संदेश
- दैनिक लोक भारती
- 27 Jul, 2026
जौनपुर। मानस अमृत परिवार के तत्वावधान में मानस अमृत लोकमंगल उत्सव का आयोजन रामेश्वरम सदन, रासमंडल, में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीरामचरितमानस के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। तत्पश्चात उपस्थित विद्वानों ने श्रीरामचरितमानस के लोकमंगलकारी संदेशों पर अपने विचार व्यक्त किए।
अध्यक्षता करते हुए प्रो. डा. माधुरी सिंह ने कहा कि श्रीरामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों, करुणा, सेवा और लोककल्याण का अमर ग्रंथ है। इसके आदर्श आज भी समाज को सही दिशा प्रदान करते हैं। डॉ. निरूपा सिंह ने कहा कि रामचरितमानस भारतीय ज्ञान परंपरा का अनुपम प्रकाश स्तंभ है।
इसके माध्यम से सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और संस्कारों का संदेश जन-जन तक पहुँचता है। प्रो. डा. दलसिंगार ने अपने सत्यपरक अनुभव दर्शन को प्रस्तुत करते हुए कहा कि जीवन वही सार्थक है जो समाज में संवेदना, समरसता और मानवता का संचार करे। उन्होंने अपनी प्रभावशाली काव्यात्मक अभिव्यक्ति से उपस्थित जनों को भावविभोर कर दिया।
प्रो.अजय कुमार दुबे ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास है। रामचरितमानस इन आदर्शों की सशक्त प्रेरणा देता है।पूर्व जिला न्यायाधीश बी.एन. सिंह ने कहा कि न्याय, सत्य, मर्यादा और नैतिकता का पालन ही आदर्श समाज की आधारशिला है तथा श्रीराम का जीवन प्रत्येक नागरिक के लिए अनुकरणीय है।
साहित्यप्रेमी, शिक्षाविद्, समाजसेवी, बुद्धिजीवी, महिलाएँ, युवा एवं बाल प्रतिभाएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं। डॉ विमला सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हमे अपनी संस्कृति और संस्कारों के प्रति सचेष्ट रहना होगा।
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