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कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड का खुलासा, बेटे सुब्रत को पुलिस ने किया गिरफ्तार

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सीडीआर, CCTV और बरामदगी से सामने आई साजिश, पुलिस के अनुसार कर्ज-जुआ और संपत्ति विवाद बना हत्या की वजह

पहले बहू शालू का नाम आया था सामने, विवेचना में उसके खिलाफ पुष्टिकारक साक्ष्य नहीं मिले; विशाल गौतम और राजकिशोर पहले ही गिरफ्तार

लोक भारती न्यूज ब्यूरो 

कानपुर। कल्याणपुर थाना क्षेत्र में 5 सितंबर 2026 को हुए दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, विवेचना में सामने आए वैज्ञानिक साक्ष्यों, CCTV फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बरामदगी और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मृतक के बेटे सुब्रत मिनोचा की घटना में संलिप्तता सामने आई है। पुलिस ने उसे हत्याकांड की साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के मुताबिक, सुब्रत ने विशाल गौतम और राजकिशोर के साथ मिलकर अपने पिता की हत्या की साजिश रची और कथित तौर पर सुपारी देकर हत्या कराई। पुलिस का कहना है कि मामले में सुब्रत की भूमिका सामने आने के बाद उसके खिलाफ नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


चाबी, रक्तरंजित कपड़े और CCTV जांच से खुली साजिश की कड़ियां

पुलिस के अनुसार, घटना के शुरुआती खुलासे के बाद विशाल गौतम और राजकिशोर को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद विवेचना के दौरान पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और आरोपियों की गतिविधियों की गहन जांच की।

पुलिस के मुताबिक, जांच में फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी, घटना के समय राजकिशोर द्वारा पहने गए रक्तरंजित कपड़े और चाबी बनाने वाले व्यक्ति से कराई गई पहचान महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आए। पुलिस ने बताया कि डुप्लीकेट चाबी विशाल गौतम के माध्यम से बनवाई गई थी।

जांच में CCTV फुटेज का विश्लेषण भी किया गया। पुलिस के अनुसार, घटना के समय फ्लैट में आने-जाने वाले लोगों का वीडियो सुब्रत को दिखाया गया, लेकिन उसने उन्हें पहचानने से इनकार किया। इसके अलावा विशाल गौतम के साथ WhatsApp पर हुई बातचीत को फोन से डिलीट किए जाने और घटना से कुछ दिन पहले उसके द्वारा नया सिम लिए जाने की जानकारी भी विवेचना में सामने आई।

पुलिस का कहना है कि सुब्रत और विशाल की घटना से पहले की लोकेशन एक ही स्थान पर मिलने तथा डुप्लीकेट चाबी बनवाने के दौरान दोनों के बीच संपर्क के साक्ष्य भी मिले हैं।

पहले शालू मिनोचा का नाम आया, लेकिन विवेचना में नहीं मिले पुष्टिकारक साक्ष्य

पुलिस के अनुसार, हत्याकांड के शुरुआती खुलासे के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने मृतक की पुत्रवधू शालू मिनोचा का नाम घटना में शामिल होने की बात कहते हुए बताया था। इसी आधार पर शालू को गिरफ्तार किया गया था।

हालांकि, बाद की विवेचना और साक्ष्य संकलन के दौरान पुलिस को शालू की घटना में संलिप्तता के पुष्टिकारक साक्ष्य नहीं मिले। पुलिस के मुताबिक, डुप्लीकेट चाबी, CDR, CCTV, बरामदगी और अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद सुब्रत की भूमिका सामने आई।

पुलिस का दावा है कि घटना की योजना के दौरान सुब्रत ने आरोपियों से कथित तौर पर यह भी कहा था कि यदि मामला सामने आता है तो उसकी संलिप्तता नहीं बताई जाए और उसकी पत्नी का नाम लिया जाए। पुलिस के अनुसार, इसी वजह से पूछताछ के दौरान शालू का नाम सामने आया था।


कर्ज, जुआ-सट्टा और संपत्ति को लेकर पिता से विवाद का दावा

पुलिस पूछताछ में विशाल गौतम द्वारा बताए गए तथ्यों के अनुसार, सुब्रत मिनोचा पर करीब 40 से 50 लाख रुपये का कर्ज था। पुलिस के मुताबिक, सुब्रत के जुआ और IPL सट्टे में शामिल होने तथा नशे की आदत से जुड़ी बातें भी पूछताछ में सामने आई हैं।

पुलिस का कहना है कि सुब्रत को अपने पिता से करीब 40 हजार रुपये प्रतिमाह जीवन निर्वाह के लिए मिलते थे, जबकि उसकी कर्ज की किस्त करीब 55 हजार रुपये प्रतिमाह बताई गई है। पुलिस के अनुसार, आर्थिक दबाव के कारण वह अपनी दुकान से दवाएं निकलवाकर विशाल गौतम के माध्यम से बेचकर पैसे जुटाता था।

जांच में यह बात भी सामने आने का दावा किया गया कि सुब्रत को आशंका थी कि उसके पिता किसी अन्य महिला से विवाह कर अपनी चल-अचल संपत्ति किसी और के नाम कर सकते हैं। पुलिस के अनुसार, इन्हीं आर्थिक और संपत्ति संबंधी कारणों के चलते सुब्रत ने पिता को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

23 सितंबर को मिला PCR, बरामदगी के बाद सामने आए नए साक्ष्य

पुलिस के अनुसार, मामले की विवेचना के दौरान अतिरिक्त साक्ष्य जुटाने के लिए न्यायालय से आरोपियों का पुलिस कस्टडी रिमांड (PCR) मांगा गया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कानपुर नगर के न्यायालय ने 23 सितंबर को दोपहर 12 बजे से 24 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक PCR स्वीकृत किया।

PCR के दौरान पुलिस टीम ने विशाल गौतम की निशानदेही पर डुप्लीकेट चाबी बरामद की और चाबी बनाने वाले व्यक्ति से उसकी पहचान कराई। वहीं राजकिशोर की निशानदेही पर घटना के समय पहने गए रक्तरंजित कपड़े सेंट्रल रेलवे स्टेशन के पास से बरामद किए गए।

पुलिस के मुताबिक, इन बरामदगियों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विवेचना आगे बढ़ाई गई, जिसके बाद सुब्रत मिनोचा का नाम प्रकाश में आया।


पुलिस ने सुब्रत को गिरफ्तार कर शुरू की आगे की कार्रवाई

पुलिस का कहना है कि CCTV, CDR, मोबाइल चैट, डुप्लीकेट चाबी, रक्तरंजित कपड़ों की बरामदगी और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के समग्र विश्लेषण से सुब्रत की भूमिका की पुष्टि हुई। इसके आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

फिलहाल पुलिस मामले में आगे की विधिक कार्रवाई कर रही है। हत्याकांड में पहले गिरफ्तार किए गए विशाल गौतम और राजकिशोर तथा शालू मिनोचा की भूमिका से जुड़े तथ्यों को भी विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर देखा जा रहा है।

 

 

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