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शिरडी में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था, वरिष्ठ नागरिकों के दर्शन से लेकर महाप्रसाद तक की सुविधा

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छह साल बाद श्री साईं बाबा के दर्शन का मिला अवसर, मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाओं का लिया जायजा

दर्शन के साथ नि:शुल्क महाप्रसाद, वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग व्यवस्था और मंदिर परिसर में कई धार्मिक स्थलों के दर्शन की सुविधा

लोक भारती न्यूज ब्यूरो

शिरडी। 23 सितंबर 2026 को श्री साईं बाबा संस्थान शिरडी में श्री रामनरेश अवस्थी और उनकी पत्नी श्रीमती विष्णु लता अवस्थी को साईं बाबा के दर्शन का अवसर मिला। करीब छह वर्षों बाद शिरडी पहुंचने पर उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं को देखा और अपने अनुभव साझा किए।

रामनरेश अवस्थी ने बताया कि अचानक शिरडी जाने की तैयारी बनी। साईं बाबा के भक्तों में प्रचलित मान्यता है कि “बाबा जिसे बुलाते हैं, शिरडी वही आता है।” छह वर्ष बाद दर्शन के दौरान उन्हें श्रद्धालुओं के लिए पहले की तुलना में कई व्यवस्थाएं देखने को मिलीं।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग दर्शन व्यवस्था

शिरडी में वरिष्ठ नागरिकों के लिए दर्शन की अलग व्यवस्था की गई है। इसके लिए उम्र की पुष्टि के लिए आधार कार्ड साथ रखना आवश्यक बताया गया। इस व्यवस्था के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को अलग मार्ग से मंदिर तक ले जाया जाता है और लगभग आधे घंटे में दर्शन करके बाहर निकलने की सुविधा मिल सकती है।

मंदिर में चढ़ावे के संबंध में बताया गया कि दर्शन के लिए जाते समय केवल शॉल और फूल साथ ले जाना उचित है। दर्शन के बाद मीठी नीम के नीचे विराजमान भगवान शिव और नंदी के दर्शन किए जा सकते हैं।

मंदिर से बाहर निकलते समय श्रद्धालुओं को बाबा की धूनी और बूंदी का प्रसाद मिलता है। इसके बाद महाप्रसाद के लिए नि:शुल्क कूपन भी उपलब्ध कराया जाता है।


नंदा दीप, दत्तात्रेय मंदिर और दक्षिणमुखी हनुमान के दर्शन

श्रद्धालु बाबा के बाग से होते हुए नंदा दीप और भगवान दत्तात्रेय मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। इसके बाद गेट नंबर-3 की ओर जाने पर एक प्राचीन मंदिर में भगवान गणेश, शनिदेव और भगवान शिव के दर्शन का अवसर मिलता है।

इसके अलावा श्रद्धालु दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के भी दर्शन कर सकते हैं। शिरडी यात्रा के दौरान द्वारकामाई और चावड़ी के दर्शन भी करने की सलाह दी गई है।

महाप्रसाद में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु करते हैं भोजन

शिरडी में श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादालय की व्यवस्था भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। नि:शुल्क महाप्रसाद के लिए मिलने वाले कूपन के जरिए श्रद्धालु प्रसादालय में प्रवेश कर सकते हैं। जो श्रद्धालु नि:शुल्क कूपन के बजाय निर्धारित शुल्क देकर भोजन करना चाहते हैं, उनके लिए कियोस्क की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। इसमें वयस्कों के लिए 50 रुपये और बच्चों के लिए 30 रुपये का कूपन बताया गया है।

बताया गया कि महाप्रसाद की व्यवस्था प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक चलती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रतिदिन करीब एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण करते हैं। एक समय में लगभग 10 हजार श्रद्धालुओं के बैठकर भोजन करने की व्यवस्था बताई गई है।

महाप्रसाद में दो प्रकार की सब्जी, दाल, चपाती, चावल और हलुआ परोसा जाता है। व्यवस्था लगातार चलने के कारण श्रद्धालुओं के पहुंचने पर साफ की गई टेबल पर भोजन की थाली और गिलास उपलब्ध कराए जाते हैं।

शिरडी में बढ़ीं श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए सुविधाएं

रामनरेश अवस्थी के अनुसार, शिरडी में श्रद्धालुओं के लिए गेस्ट हाउस, अस्पताल, विद्यालय, सड़कें, सर्विस रोड, रेलवे और एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं विकसित हुई हैं। पालखी लेकर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सर्विस रोड की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया।

इसके अलावा पुस्तक और प्रसाद के स्टॉल तथा बच्चों के मनोरंजन के साधन भी श्रद्धालुओं को उपलब्ध होते हैं। शिरडी में बड़ी संख्या में होटल और प्रसाद व फल की दुकानें हैं, जिनसे स्थानीय लोगों को रोजगार और आजीविका का अवसर मिलता है।

श्रद्धा और सबूरी का संदेश लेकर लौटते हैं श्रद्धालु

शिरडी में देश-विदेश से श्रद्धालु साईं बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। खासकर दक्षिण भारत सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं और “श्रद्धा और सबूरी” का संदेश लेकर लौटते हैं।

साईं बाबा के प्रति भक्तों में यह आस्था है कि उनके दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं को देखकर रामनरेश अवस्थी ने इसे साईं बाबा के आशीर्वाद से जुड़ा अनुभव बताया।

 

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