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कुशाग्र हत्याकांड में ट्यूशन टीचर, बॉयफ्रेंड और दोस्त को उम्रकैद, कोर्ट ने कहा—मरते दम तक जेल में रखा जाए

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कानपुर में कारोबारी के बेटे कुशाग्र कनोडिया की अपहरण के बाद हत्या के सनसनीखेज मामले में अदालत ने ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। इस जघन्य अपराध में ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसका प्रेमी प्रभात शुक्ला और उसका दोस्त आर्यन उर्फ शिवा को उम्रकैद की सजा दी गई है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि तीनों दोषियों को मरते दम तक जेल में रखा जाएगा। इसके साथ ही तीनों पर कुल 2 लाख 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। फैसला सुनते ही कोर्ट परिसर में मौजूद परिजनों की आंखें नम हो गईं। कुशाग्र की मां सुनीता अपने आंसू नहीं रोक सकीं और उन्होंने न्यायालय से दोषियों को फांसी देने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उनके बेटे का गला दबाकर हत्या की है, उन्हें भी वही सजा मिलनी चाहिए। कुशाग्र के चाचा ने भी अदालत के बाहर भावुक बयान देते हुए कहा कि ढाई साल से पूरा परिवार न्याय की आस में कोर्ट के चक्कर काट रहा था और अब भी उन्हें लगता है कि फांसी की सजा ही उनके भतीजे की आत्मा को शांति दे सकेगी। परिवार ने साफ कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में फांसी की सजा की मांग को लेकर अपील करेगा।

यह मामला 30 अक्टूबर 2023 का है, जब आचार्य नगर निवासी कपड़ा कारोबारी मनीष कनोडिया का 16 वर्षीय बेटा कुशाग्र शाम करीब चार बजे स्कूटी से स्वरूप नगर स्थित मेनन कोचिंग जाने के लिए घर से निकला था। रास्ते में उसकी मुलाकात उसकी ही ट्यूशन टीचर रचिता वत्स के प्रेमी प्रभात शुक्ला से हुई। प्रभात ने स्कूटी खराब होने का बहाना बनाकर कुशाग्र से लिफ्ट मांगी और उसे ओम नगर स्थित इंद्र कुटी हाता में अपने घर ले गया। वहां पहले से पूरी साजिश रची जा चुकी थी। सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई दिया कि प्रभात आगे-आगे चल रहा था और कुशाग्र उसके पीछे स्टोरनुमा कमरे में गया। उसी कमरे के बगल में रचिता मौजूद थी, जबकि तीसरा आरोपी आर्यन बाहर निगरानी कर रहा था। कमरे के अंदर प्रभात ने रस्सी से कुशाग्र का गला कस दिया और आवाज न निकले, इसके लिए उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया गया। यह पूरी घटना करीब 43 मिनट तक सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड होती रही, जो बाद में कोर्ट में सबसे मजबूत सबूत के रूप में पेश की गई।

हत्या के बाद भी आरोपियों ने फिरौती वसूलने की कोशिश की। तीनों ने पहले से 30 लाख रुपये की फिरौती मांगने का पत्र तैयार कर रखा था। घटना वाले दिन आर्यन रचिता की स्कूटी से कुशाग्र के घर पहुंचा और घर के अंदर फिरौती का पत्र फेंक दिया। यह पूरी घटना भी सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। हालांकि, पुलिस की सतर्कता और तकनीकी साक्ष्यों के चलते आरोपियों की साजिश ज्यादा दिन नहीं चल सकी। पुलिस ने इस मामले में 600 पेज की चार्जशीट दाखिल की और कोर्ट में 14 गवाह पेश किए गए। ट्रायल के दौरान 240 पेज की जिरह हुई और पुलिस ने वारदात से जुड़ी 112 वस्तुएं भी बरामद कीं। 9 फरवरी 2024 को केस सत्र न्यायालय भेजा गया था और 3 मई को आरोप तय किए गए। कुल 711 दिनों में 135 सुनवाई हुईं और आखिरकार 135वीं सुनवाई में कोर्ट ने तीनों दोषियों को सजा सुना दी।

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