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24 घंटे में 111 लोग घायल ,8 की हुई मौत।

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 कुशीनगर। जनपद में होली के त्योहार पर जहां पूरे जिले में रंग-गुलाल और उत्साह का माहौल रहा, वहीं दूसरी ओर हादसों और मारपीट की घटनाओं के कारण कुशीनगर जिला अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ देखने को मिली। बीते 24 घंटे के भीतर अस्पताल में 200 से अधिक मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से 111 लोग सड़क दुर्घटनाओं और आपसी मारपीट की घटनाओं में घायल होकर अस्पताल पहुंचे।अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, होली के दिन ओपीडी और इमरजेंसी दोनों में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रही। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को लगातार व्यस्त रहना पड़ा। ओपीडी में करीब 200 मरीजों को देखा गया, जबकि एक्स-रे विभाग में 213 लोगों के एक्स-रे किए गए। इसके अलावा लगभग 40 मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) भी दर्ज किए गए, जिनमें अधिकतर मामले सड़क हादसों और झगड़ों से जुड़े थे।होली के दौरान जिले में सरकारी एंबुलेंस सेवा 108 और 102 भी पूरी तरह सक्रिय रही। इन एंबुलेंसों के माध्यम से लगभग 250 मरीजों को विभिन्न स्थानों से जिला अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाया गया। इनमें अधिकतर मामले सड़क दुर्घटनाओं और आपसी विवाद में घायल लोगों के थे। दुर्घटना और मारपीट के अधिकतर मामले खड्डा और नेबुआ नौरंगिया (कसया) थाना क्षेत्रों से सामने आए।होली के अगले दिन गुरुवार को पोस्टमार्टम हाउस में कुल आठ शव पहुंचे। इनमें पांच लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई थी। इसके अलावा एक शव लावारिस हालत में मिला, जबकि एक महिला का शव कसया क्षेत्र से एक दिन पहले बरामद किया गया था। इन सभी शवों का पोस्टमार्टम कराया गया।मिली जानकारी के अनुसार कसया क्षेत्र से सबसे अधिक चार शव पोस्टमार्टम के लिए लाए गए, जबकि खड्डा, पडरौना और कुबेरस्थान क्षेत्रों से एक-एक शव आया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि जिले में होली के दौरान कोई बड़ी अप्रिय घटना दर्ज नहीं की गई, लेकिन विभिन्न थाना क्षेत्रों में छोटी-मोटी मारपीट और झड़प की घटनाएं जरूर सामने आईं, जिन पर पुलिस द्वारा कार्रवाई की गई।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार त्योहार के दौरान अचानक बढ़ी मरीजों की संख्या के बावजूद डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने पूरी तत्परता के साथ सभी मरीजों का इलाज किया। इमरजेंसी वार्ड में अतिरिक्त व्यवस्था की गई थी, जिससे घायलों को तुरंत उपचार मिल सके।
होली के मौके पर जिले भर में पुलिस और प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। विभिन्न थाना क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी, ताकि किसी भी प्रकार की बड़ी घटना को रोका जा सके। इसके बावजूद सड़क दुर्घटनाओं और आपसी विवादों के कारण कई लोग घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।त्योहार की खुशियों के बीच हुई इन घटनाओं ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि पर्व-त्योहार के दौरान भी लोगों को सतर्क रहने और यातायात नियमों का पालन करने की जरूरत है, ताकि खुशियों के इस माहौल में किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।

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