शाहजहांपुर। लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका केवल खबरें जुटाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे शासन-प्रशासन और जनता के बीच जवाबदेही की मजबूत कड़ी होते हैं। ऐसे में यदि किसी पत्रकार के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किए जाने का आरोप लगे तो यह केवल दो व्यक्तियों का मामला नहीं, बल्कि प्रेस की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है। शाहजहांपुर में दो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पत्रकारों को एसओजी द्वारा पूछताछ के लिए साथ ले जाने की घटना के विरोध में जिलेभर के पत्रकार एकजुट हो गए। प्रेस क्लब से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की गई और विकास भवन में पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित को ज्ञापन सौंपते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई। बढ़ते विरोध के बीच एसपी ने प्रथम दृष्टया पुलिस की चूक स्वीकार करते हुए जांच के आदेश दिए और कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।24 जुलाई की शाम हिंदी खबर के पत्रकार प्रभाकर मिश्रा और नेटवर्क-10 नेशनल न्यूज के पत्रकार विशेक मिश्रा पुवायां जा रहे थे। आरोप है कि चिनौर रोड पर एसओजी टीम ने दोनों को रोककर पूछताछ के नाम पर अपने साथ ले लिया। काफी देर तक पुलिस अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई। बाद में जानकारी मिली कि डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के काफिले को काले झंडे दिखाने से जुड़ा वीडियो वायरल होने के संबंध में उनसे पूछताछ की जा रही थी।घटना की जानकारी मिलते ही जिलेभर के पत्रकारों में रोष फैल गया। बड़ी संख्या में पत्रकार रिजर्व पुलिस लाइन स्थित एसओजी के इंटरोगेशन रूम पहुंच गए और विरोध जताया। पत्रकारों का कहना था कि बिना किसी ठोस आधार के पत्रकारों को अपराधियों की तरह उठाकर ले जाना प्रेस की स्वतंत्रता पर आघात है। विरोध बढ़ने और कोई ठोस साक्ष्य सामने न आने पर एसओजी ने दोनों पत्रकारों को छोड़ दिया।पत्रकारों का आरोप है कि घटना के बाद जब पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित से पूरे मामले की जानकारी ली गई तो उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान अनुचित भाषा का प्रयोग किया, जिससे पत्रकारों में और अधिक नाराजगी फैल गई।अगले दिन उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन, सेंट्रल जर्नलिस्ट एसोसिएशन, श्रमजीवी पत्रकार एसोसिएशन तथा उपज सहित विभिन्न पत्रकार संगठनों ने प्रेस क्लब में संयुक्त बैठक कर घटना की निंदा की। इसके बाद पत्रकारों ने प्रेस क्लब से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालकर पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विकास भवन स्थित सभागार में पहुंचकर पत्रकारों ने स्पष्ट कहा कि जब तक पुलिस अधीक्षक स्वयं आकर पूरे मामले पर बात नहीं करेंगे, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे।पत्रकारों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर पहुंचा। इसके बाद पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित विकास भवन पहुंचे और कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में पत्रकारों के साथ विस्तृत वार्ता की। पत्रकारों ने उन्हें छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपते हुए एसओजी प्रभारी एवं पूरी टीम को तत्काल निलंबित करने, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने तथा भविष्य में किसी भी पत्रकार से पूछताछ या कार्रवाई से पहले संबंधित पत्रकार संगठन को सूचना देने सहित अन्य मांगें रखीं।वार्ता के दौरान पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने कहा कि प्रथम दृष्टया पुलिसकर्मियों से चूक हुई है। पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों के साथ जो घटना हुई, उसकी जिम्मेदारी उनकी है। भविष्य में पुलिस और पत्रकारों के बीच बेहतर समन्वय रखा जाएगा ताकि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। उन्होंने पत्रकारों से भी पुलिस का सहयोग करने की अपेक्षा जताई।पत्रकारों ने एसओजी प्रभारी सहित पूरी टीम को तत्काल निलंबित करने की मांग दोहराते हुए कहा कि पत्रकारों के साथ किसी भी प्रकार की अलोकतांत्रिक और गैरकानूनी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।ज्ञापन सौंपने के दौरान आरिफ सिद्दीकी, कुलदीप दीपक, शिव कुमार चंद्रा, विवेक सेंगर, आशीष त्रिपाठी, अंबुज मिश्र, प्रेम शंकर, गोविंद अवस्थी, स्वदेश शुक्ला, अनिल मिश्रा, कमल सिंह, बलराम शर्मा, उदित शर्मा, सरदार शर्मा, राम लड़ैते तिवारी, महेंद्र चावला, रागिनी श्रीवास्तव, साजिद खान, पंकज सक्सेना, नीरज वाजपेयी, संतोष उपाध्याय,आले नबी, हरी ओम त्रिवेदी, नरेंद्र यादव, अजय यादव, सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।
इसी क्रम में जलालाबाद तहसील के पत्रकारों ने एकजुट होकर एसओजी प्रभारी एवं उनकी टीम पर पत्रकारों के साथ अभद्रता और अपराधियों जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया। पत्रकारों ने उपजिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार रोहित कटियार को सौंपते हुए निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा और पुलिस प्रशासन से संबंधित खबरों का बहिष्कार किया जाएगा।ज्ञापन सौंपने के दौरान गौरीशंकर त्रिवेदी, कमल पाण्डेय, आकाश मिश्रा, अंकित दीक्षित, प्रिंस गुप्ता, पंकज यादव, विनोद राजपूत, करण गुप्ता, हमीद, विकास राठौर, शकील अहमद, प्रियंका गुप्ता, देवेश्वर, कृष्ण कुमार पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।