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हाईटेंशन लापरवाही ने निगल ली दो जिंदगियां !
- दैनिक लोक भारती
- 08 Jun, 2026
जहानाबाद (पीलीभीत)। आखिरकार वही हुआ जिसका डर गांव वाले वर्षों से जता रहे थे। झूलते बिजली के तारों, विभागीय उदासीनता और जिम्मेदारों की अनदेखी ने रविवार देर रात दो जिंदगियां लील लीं। दरसल एक एक निजी बस हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गई और देखते ही देखते पिता-पुत्र की मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में मातम और लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार जहानाबाद थाना क्षेत्र के गांव गौनेरी वदी निवासी चांद बाबू पुत्र शब्बीर खां की बारात का प्रोग्राम था।जिसमें रिश्तेदार सज्जन खां पुत्र छमन, सुभान खां पुत्र सज्जन खां निवासी मोहल्ला फारूख खां पीलीभीत निजी बस से बारात लेकर बरेली गया था। रविवार देर रात 11 बजे बारातियों को उतारने के बाद सज्जन खां अपने बस लेकर घर के लिए वापस लौट रहे थे। तभी बस सड़क किनारे झूल रही हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गई। बताया जा रहा है कि सामने से तेज रफ्तार से आ रही इको गाड़ी को साइड देने के चलते बस का ऊपरी हिस्सा बिजली लाइन के संपर्क में आ गया। इस दौरान लाइन से बस में करंट उतर आया और बस चालक के साथ मौजूद सुभान खां करंट की चपेट में आ गया। तभी बेटे को बचाने दौड़े पिता सज्जन खां भी करंट के संपर्क में आ गए। इस दौरान दोनों गंभीर रूप से झुलस गए और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी जिंदगी की डोर टूट गई।
हादसे के बाद घटनास्थल पर एकत्र ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बावजूद विभाग ने झूलते तारों को ठीक कराने की जहमत नहीं उठाई। यदि समय रहते कार्रवाई होती तो शायद दो परिवारों के चिराग न बुझते।
हंगामे के बीच पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात को काबू में किया और दोनों शव पोस्टमार्टम को भेजे गए। सहायक पुलिस अधीक्षक और तहसील प्रशासन ने भी मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित
गौनेरी वदी बस हादसे को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति में सदर एसडीएम, सहायक पुलिस अधीक्षक नताशा गोयल, एआरटीओ सुनील कुमार मिश्रा तथा विद्युत विभाग के अभियंता शामिल हैं। डीएम ने टीम को हादसे के कारणों और जिम्मेदारियों की जांच कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
शिकायतें होती रहीं, विभाग सोता रहा!
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बिजली के तार लंबे समय से बेहद नीचे लटक रहे हैं। ग्राम प्रधान कृष्ण गोपाल के अनुसार उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया। यहां तक कि राज्यमंत्री की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
वहीं क्षेत्र पंचायत सदस्य गीतेश कुमार ने बताया कि इससे पहले भी बिजली विभाग की लापरवाही से गांव में फसलें जल चुकी हैं, पशुओं की मौत हो चुकी है और एक युवक अपनी जान गंवा चुका है। इसके बावजूद विभाग ने सबक लेना जरूरी नहीं समझा।
शायद विभाग को किसी मौत का इंतजार था!
ग्रामीणों के आरोपों पर भरोसा किया जाए तो लगता है कि बिजली विभाग के लिए चेतावनी कोई मायने नहीं रखती। खेत जले, पशु मरे, शिकायतें हुईं, आवेदन दिए गए, अधिकारियों को बताया गया—लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। विभागीय उदासीनता से ऐसा प्रतीत होता है कि फाइलों को हिलाने के लिए किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार था। दुर्भाग्य से वह त्रासदी अब दो इंसानी जिंदगियां बनकर सामने आ चुकी है।
यह सिर्फ हादसा नहीं बल्कि लापरवाही है!
अब सवाल यह है कि क्या जांच रिपोर्ट भी किसी फाइल में दबकर रह जाएगी, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी? क्योंकि गांव वालों का दर्द साफ कह रहा है—यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही की कीमत पर हुई दो मौत हैं।
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